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पुलिस कमिश्नरेट : शांति भंग में पहली बार जमानत राशि जब्त करने का आदेश

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जनार्दन मिश्र, लखनऊ। पुलिस कमिश्नरेट में पहली बार शांति भंग के मामले में जमानत राशि जब्त करने का आदेश दिया गया है। दरअसल, शांति भंग करने पर आपराधिक प्रवृत्तियों वाले व्यक्तियों के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 107-110 के तहत कार्रवाई की जाती है। आमतौर पर धारणा है कि परिशांति भंग की कार्रवाई जमानत देने, बांड भरने या दोनों करने पर छह महीने में अपने आप समाप्त हो जाती है। इस धारणा को लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने तोड़ने की पहल की है।
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एसीपी कृष्णा नगर विकास कुमार पांडेय की अदालत ने अपराधियों की जमानत राशि और बॉन्ड की आधी राशि जब्त करने का आदेश दिया है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस आयुक्त न्यायालय मलिहाबाद के पीठासीन अधिकारी सहायक पुलिस आयुक्त कृष्णानगर ने शांति भंग के मामले में कार्रवाई करते हुए यह आदेश सुनाया।
उन्होंने मवईखुर्द निवासी नरेंद्र सिंह उर्फ रवी, विजय कुमार, रज्जन सिंह उर्फ शैलेंद्र सिंह और कौशलेंद्र प्रताप सिंह उर्फ राजू के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 151, 107-116 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें 21 फरवरी 2024 से अगले छह महीने के लिए परिशांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया था। न्यायालय ने मामले में अभियुक्तों से 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और 50 हजार रुपये की जमानत देने का आदेश दिया गया था। पाबंदी की अवधि में ही अभियुक्तों ने अपराध किया, जिसकी रिपोर्ट थाने से मिलने पर एसीपी न्यायालय ने अभियुक्तों की जमानत राशि और व्यक्तिगत बॉन्ड की राशि वसूलने का नोटिस जारी किया था।
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इसी मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अभियुक्तों की जमानत की राशि 50 हजार और व्यक्तिगत बॉन्ड की राशि में से 25 हजार राज्य के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार दोषियों को जब्त धनराशि एक सप्ताह में जमा करनी होगी।
पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के संयुक्त निदेशक अभियोजन अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि इस प्रकार की कार्रवाई संभवत: प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नरेट में पहली बार हुई है।
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