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मौत की नींद सुलाने वाले 'जहर' की फैक्ट्री पकड़ी

Sun, 02 Aug 2015 02:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मिथाइल अल्कोहल यानी ऐसा जहर जो हलक के नीचे पहुंचने पर मौत की नींद सुला दे या फिर जिंदगी भर के लिए अपंग बना दे। मलिहाबाद कांड के बावजूद इस जहर को शराब के रूप में परोसने का धंधा फल-फूल रहा है। हालांकि धंधेबाजों ने तरीका थोड़ा बदल दिया है।
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मौत का कारोबार करने वाले मिथाइल अल्कोहल को ब्रांडेड देसी शराब की शीशियों में पैक कर रहे हैं। उसपर बाकायदा सहारनपुर के देशी शराब के ब्रांड ‘धन्नो’ का स्टीकर और आबकारी का लोगो लगा रहे हैं।

मड़ियांव के दाउदनगर इलाके एक निर्माणाधीन मकान में शनिवार को ऐसी ही फैक्ट्री पकड़ी गई। इस फैक्ट्री से भारी मात्रा में शराब व मिथाइल अल्कोहल बरामद हुआ। तीन आरोपियों को दबोचा गया। जहर की सप्लाई में इस्तेमाल हो रही दो कारें भी जब्त की गई हैं।  एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने मौके पर जाकर छानबीन की।
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एक साल पहले भी पकड़ा गया, फिर भी धंधे में
गिरफ्तार किए गए तीन लोगों में सीतापुर के मानपुर का रहने वाला सोनू जायसवाल, तालगांव का मंजीत जायसवाल और मड़ियांव के खदरी का रहने वाला श्यामू सिंह शामिल है। एसएसपी पांडेय के मुताबिक इनमें से सोनू पहले शराब की कई दुकानों पर काम कर चुका है। वह यहां त्रिवेणीनगर तृतीय में किराए के मकान पर रहता था।

जिस निर्माणाधीन मकान में शराब की फैक्ट्री चल रही थी वह सोनू का ही है। वहीं श्यामू को एक साल पहले भी अवैध शराब बनाने के जुर्म में दो साथियों के साथ पकड़ा गया था। बरामद कारों में वैगन आर सोनू की है जबकि इंडिगो श्यामू सिंह की है।
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10 रुपये में तैयार कर 70 में बेचते थे एक शीशी

इंस्पेक्टर मड़ियांव के मुताबिक धंधेबाज मिथाइल अल्कोहल को गरम पानी में मिलाते थे। फिर उसमें रंग मिलाया जाता था। इसके बाद इसे शीशियों में पैक किया जाता। पैकिंग के बाद उस पर सहारनपुर में बनने वाली देशी शराब ‘धन्नो’ का स्टीकर लगाया जाता था। आबकारी का होलोग्राम चिपकाया जाता। आरोपियों ने कुबूला कि इस एक शीशी ‘जहर’ पर उनकी कुल लागत 10 रुपये आती थी जबकि 70 रुपये में वे इसे बेच लेते थे।

बदलते रहते थे शराब बनाने की जगहें
मड़ियांव इंस्पेक्टर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक पकड़े गए लोगों ने पूछताछ में बताया है कि शराब फैक्ट्री एक सप्ताह पहले ही शुरू की गई थी जबकि इलाकाई लोग इसे एक महीना पुरानी कह रहे हैं। इंस्पेक्टर का कहना है कि पकड़े जाने के डर से तीनों शराब बनाने के लिए अलग-अलग जगहों का इस्तेमाल करते थे।

आबकारी विभाग से लाते थे होलोग्राम
जहरीली शराब के कारोबारियों की आबकारी विभाग में सेटिंग थी। उनके पास से मिले होलोग्राम स्टीकर देखकर मौके पर आए आबकारी विभाग के अफसर भी हैरान रह गए। इंस्पेक्टर मड़ियांव का कहना है कि आबकारी विभाग का ही कोई व्यक्ति होलोग्राम स्टीकर उपलब्ध कराता था। विभाग के अफसरों-कर्मचारियों की मिलीभगत की पड़ताल भी पुलिस कर रही है।
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शाबाश...इस टीम ने पकड़ा धंधेबाजों को

पुलिस टीम में दरोगा अरुण कुमार अस्थाना, विवेक कुमार त्रिपाठी, दिनेश कुमार पांडेय, मुख्य आरक्षी सीताराम मिश्रा, मनोज कुमार पाठक, आरक्षी त्रिलोकी नाथ मिश्रा, राधेश्याम सिंह, विजय सिंह, राजीव पांडेय, धवन सिंह, ज्ञान सिंह शामिल थे।

मलिहाबाद में 58 को मौत की नींद सुला चुका है ये ‘जहर’
12 जनवरी को मलिहाबाद के दतली और खड़ता गांव में मिथाइल अल्कोहल से बनी शराब पीने से 58 लोगों की जान चली गई। वहीं 30 ऐसे हैं जिनमें किसी की आंखों की रोशनी गई तो किसी की किडनी खराब हुई।

जहर बनाने की फैक्ट्री में क्या मिला
-40 कर्टन में बनाई गई शराब की 470 शीशियां, जबकि छह ड्रम पैकिंग के लिए तैयार मटेरियल
- छह लीटर मिथाइल अल्कोहल
- छह खाली ड्रम
-छह बोरे खाली शीशियां
-लाल रंग का एक डिब्बा जिसमें कोई केमिकल

-अल्कोहल मापक यंत्र
-एक बोरी देशी शराब का स्टीकर
-दो रोल आबकारी विभाग के होलोग्राम का स्टीकर
-एक शीशी इत्र, दो रोल टेप, एक पॉलीथिन रबर बैंड
-तीन पॉलीथिन में शीशी के ढक्कन व रबर के वॉशर
-प्लास, हथौड़ी, पेंचकस जैसे उपकरण
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