लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम आदेश में निजी जमीन और संपत्ति के विवादों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के दखल पर स्पष्ट सीमा तय की है। कोर्ट ने कहा कि वे किसी पक्ष को कब्जा दिलाने या दूसरे पक्ष को बेदखल करने की कारवाई नहीं कर सकते हैं। ऐसे मामलों का फैसला केवल सक्षम अदालत ही करेगी। पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने तक ही सीमित है।
न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति ए के चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश राजधानी के आलमबाग निवासी 85 वर्षीय इंद्रपती व एक अन्य की याचिका पर दिया। याचियों का कहना था कि पुलिस उनकी जमीन पर कब्जे में दखल दे रही है और बगैर किसी अदालती आदेश के उन्हें परेशान किया जा रहा है।
कोर्ट ने मामले के रिकार्ड को देखने पर पाया कि यह मामला पारिवारिक संपत्ति के विवाद का है, जिसका दीवानी मुकदमा लंबित है। ऐसे में रिट अधिकारिता के तहत इसमें दखल का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ऐसे मामलों के लिए जारी शासन के आदेशों और डी जी पी के सर्कुलर का जिक्र करके कहा कि इनका सभी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पालन किया जाना चाहिए। चेतावनी दी कि इन निर्देशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कारवाई के साथ अवमानना की भी कार्यवाही की जा सकती है।
इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।