यश ने यूपीआई के जरिये जिन खातों में रकम भेजी थी, उनका ब्योरा बैंक ने पुलिस को उपलब्ध करा दिया है। पुलिस संबंधित खाताधारकों से संपर्क कर रही है। यश की आत्महत्या मामले को एक सप्ताह बीत चुका है।उसकी मां विमला की तबीयत में सुधार नहीं हो पा रहा है। विमला को दो बार अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है। भाई की मौत के बाद से मासूम गुनगुन भी स्कूल नहीं जा पा रही है। गुनगुन यह कहकर रोने लगती है कि अब वह स्कूल किसके साथ जाएगी। बेटे की मौत ने सुरेश को भी तोड़कर रख दिया है। उनकी अब तक की जमा पूंजी भी चली गई।
सुरेश ने कहा कि वह क्या करें, उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा है। यश के चाचा ग्राम प्रधान प्रद्युम्न सिंह यादव ने बताया कि भतीजा भी चला गया और सुरेश की जमा पूंजी भी चली गई। वह परिवार को सदमे से बाहर लाने का प्रयास कर रहे हैं।
बच्चों को जागरूक कर रहे एसीपी
यश की आत्महत्या के बाद एसीपी रजनीश वर्मा स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक कर रहे हैं। सोमवार को मोहनलालगंज के एएसएन पब्लिक स्कूल में जागरूकता गोष्ठी हुई। एसीपी ने बच्चों को ऑनलाइन गेम के दुष्प्रभाव के बारे में बताया। उन्होंने साइबर अपराध से बचाव के तरीके भी बताए। एसीपी ने छात्रों को व्यक्तिगत जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, पासवर्ड, बैंक विवरण आदि को ऑनलाइन साझा करने से बचने के लिए कहा। फर्जी ईमेल, संदिग्ध लिंक और धोखाधड़ी वाले मेसेज मिलने पर सतर्कता बरतने की सलाह दी। ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े अन्य खतरों पर चर्चा की। बताया कि इसकी लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। आर्थिक नुकसान तो होता ही है।
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सामने आई विधि छात्रा, बताई आपबीती
पुरनिया निवासी विधि छात्रा काजल शुक्ला ने हिम्मत दिखाते हुए अमर उजाला को आपबीती बताई। काजल ने बताया कि वह फ्री फायर गेम की लती हो गई थीं। उन पर इस गेम का प्रभाव इतना ज्यादा था कि पढ़ने में मन नहीं लगता था। काजल के मुताबिक वह एलएलबी प्रथम वर्ष की छात्रा हैं। गेम की लत की वजह से परीक्षा में उनके बैक पेपर आ गए। मासूम बच्चे की आत्महत्या की घटना ने उनको अंदर तक झकझोर दिया और उसी दिन उन्होंने गेम मोबाइल से हटा दिया। वह मोहल्ले के अन्य लोगों को भी गेम न खेलने के लिए समझा रही हैं।काजल ने इस गेम पर प्रतिबंधित लगाने की मांग की है।
छात्र-छात्राओं को जागरूक करती पुलिस।
छात्र-छात्राओं को जागरूक करती पुलिस।