कोतवाल केके मिश्रा ने बताया कि पकड़े गए लोग गिरोह बंद तरीके से ठगी करते थे। ये लोग अजीत मौर्या के साथ गाड़ी लेकर निकलते थे और रास्ते में इनमें से एक साथी राशिद महिला के कपड़े पहनकर मुंह ढक के पीछे बैठ जाता था और अनजान सवारियों को बैठा लेते थे।
थोड़ी दूर जाकर उस सवारी का पैसा छीनकर उसे भगा देते थे। वहीं ये लोग पीतल का बिस्कुट लेकर उसके चारों कोनों में सोना जुड़वा देते थे और सोने का बिस्कुट कहकर लोगों को ठगते थे। जब कोई बिस्कुट लेकर सुनार की दुकान में चेक कराता था तो उसे सोने का बता दिया जाता था क्योंकि कोनों में सोना लगा होता था।
यही नहीं नकली नोट देकर भी लोगों को ठगते थे। पकड़े गए लोगों के पास साढ़े 18 हजार रुपये और वही एक बिस्कुट का टुकड़ा मिला है। गिरोह को पकड़ने वाली टीम में कोतवाल केके मिश्रा के अलावा साउथ सिटी चौकी प्रभारी यशवंत सिंह, वृंदावन चौकी प्रभारी अमित कुमार उप निरीक्षक अरविंद कुमार व स्पेशल टीम के सिपाही विमल, प्रवीण और विकास यादव शामिल रहे।
गिरोह में पकड़ा गया विजय प्रधान मूल रूप से सिक्किम राज्य का रहने वाला था और लुधियाना में नौकरी करता था। चार-पांच वर्ष पूर्व लुधियाना में अजीत मौर्या और उसके साथियों ने उसे ठग लिया। फिर वह इन ठगों को खोजने लगा। विजय प्रधान की मुलाकात कुछ दिन बाद इन ठगों से हो गई।
विजय प्रधान ने भी ठगी का गैंग जॉइन कर लिया और अपनी नौकरी पेशा छोड़ गैंग में शामिल होकर ठगी करने लगा। पकड़े गए गैंग में तीसरे सदस्य शिवकमल को अजीत मौर्या का धंधा इतना अच्छा लगा कि उसने अजीत से प्रभावित होकर उसे साउथ सिटी के पास अपने गांव पिपरौली में 18 लाख रुपये का एक प्लाट भी खरीदवा दिया।
उसका मकान बन रहा था जिसकी देखरेख भी शिवकमल ही कर रहा था। वहीं राशिद अहमद महिला का रूप धरने में माहिर था और कार की पिछली सीट पर मुंह ढककर बैठ जाता था। इस दौरान ये लोग उसी व्यक्ति को शिकार बनाते थे जो अकेले खड़ा होता था और किसी वाहन का इंतजार कर रहा होता था।