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काव्य यात्रा : हिंदी की सेवा के लिए कवि का सच बोलना और सच लिखना जरूरी : डॉ. कुमार विश्वास

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गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में रविवार को काव्य यात्रा में बोलते डॉ. कुमार विश्वास। - फोटो : LKO CITY
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लखनऊ। 17-18 साल की उम्र में अशोक चक्रधर के संचालन में पहली बार मंच पर चढ़ा दिया। गीत सुनाया, तारीफ मिली, कुछ दिनों बाद लोगों ने कविता पढ़ने के लिए बुलाया। सम्मेलन के बाद 100 रुपये लिफाफे में मिले। तब मुझे लगा कि पत्रिकाओं में लेखन के 35 रुपये वो भी 3 महीने बाद, कविता सुनाने के बाद ये सम्मान। काव्य के माध्यम से हिंदी की सेवा का अंदाज भा गया और आज आप सबके सामने हिंदी की सेवा लगातार जारी है। रविवार को गोमतीनगर इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में सजी साहित्य संध्या में कवि डॉ. कुमार विश्वास के साथ हुए प्रेरक संवाद सत्र में उन्होंने अपने और अपनी काव्य यात्रा के बारे में खूब बातें की। अतिथियों में उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, विधायक डॉ. नीरज बोरा, पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर, शैलेंद्र शर्मा अटल मौजूद रहे। संवाद के साथ बीच-बीच में कुमार विश्वास ने अपने अंदाज में रचनाओं को भी सुर दिए। युवा लेखक अक्षत थापा ने उनके साथ संवाद किया।
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अटल जी से एक टिकटार्थी को मिलवाया
संवाद सत्र में छात्र से कवि, पढ़ाई पूरी करने, सेवा में आने, कॉलेज जॉइन करने के जिक्र के बाद कुमार विश्वास ने एक किस्सा साझा किया, जब वे एक टिकटार्थी नेता को अटल जी से मिलवाने जा पहुंचे। अटल जी से बातचीत के बाद उन्हें टिकट क्यों नहीं मिला ये तो अटल जी जाने, लेकिन मुझे लगा कि सूरज के पास जाकर उन टिकटार्थी महोदय ने एक ही दिन का प्रकाश मांग कर गलती की। वेबसीरीज से बिगड़ती भाषा पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इसके स्क्रिप्ट लेखक प्रदेश की भाषा का कबाड़ा कर रहे हैं। अवधी, भोजपुरी, ब्रज, बुंदेली, खड़ी सब आपस में मिला दे रहे।
चुटकुले सुनाने वालों को कैसे कह दूं कवि...
एक सवाल के जवाब में कहा कि एक दौर आया जब मुझे लगा कि फूहड़ चुटकुले सुनाकर वाहवाही लेने वाले लोग कवि नहीं हो सकते। मेरा मानना है कि राजनीति हो या साहित्य गर खराब लोग मंच पर आ गए हैं तो मंच छोड़ने से नहीं, उनको अपनी प्रतिभा के दम पर टक्कर देकर उन्हें अपदस्थ करना चाहिए। संवाद के दौरान खुद के लिए आलोचक नामवर सिंह के आशीर्वाद, राजनीति में ओछी बयानबाजी के किस्से भी सुनाये। मजाकिया लहजे में कहा कि अभी तो मंच से ही सुनाते हैं, गर चौराहे पर सुनाने लगे तो हर दल के लोगों को दिक्कत हो जाएगी।
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लखनऊ दिल से निकलता नहीं...
श्रोताओं की मांग पर गोमती का मचलता ये पानी भी है, हिंद के गदर की कहानी भी है, हम लखनऊ से तो निकल जाते है पर लखनऊ दिल से निकलता नहीं... से लखनऊ का अंदाज बयां किया। कहा कल जब तक कुमार विश्वास नहीं था लखनऊ घूमने का कोई संकट नहीं था, आज घूमने का मन करता है तो पहचान आड़े आ जाती है। सच कितना बोला जाए, गूंगे सिखा रहे हैं हमको, मुंह कितना खोला जाए.... के अलावा कई गीत और अपनी सिग्नेचर कविता कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है.... सुनाई।
....जरा पेट्रोल पर भी सवाल कोई पूछे
संवाद के दौरान कई बार सरकारों के काम करने के सिस्टम को लेकर जिक्र करते हुए कहा कि देया के शासकों, सैनिकों को नमन के उनके पराक्रम से चीन के पैर उखड़ गए, तंबू समेटकर वो वापस लौटा, लेकिन पेट्रोल की सरपट रफ्तार पर भी लोगों को सरकार से सवाल पूछ लेने चाहिए।
अभय और शशिकांत की रचनाओं पर बजी तालियां
समारोह में युवा ओज कवि अभय सिंह निर्भीक ने सैनिकों के पराक्रम को ओज का स्वर दिए। सीना ताने स्वाभिमान से सीमाओं पर हम रहते हैं, हंसते हंसते वक्षस्थल पर सीधे गोली हम चाहते, जब भी शीश वतन ने मांगा शीश दान कर आते हैं... से रोंगटे खड़े किए। मप्र से आये हास्य व्यंग्य के कवि शशिकांत यादव ने व्यंग्य कविताओं के अलावा मौजूदा दौर पर राजनेताओं की हालत को बयां किया तो तालियां गूंजी।

गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में रविवार को काव्य यात्रा में कवि कुमार विश्वास का सम्?- फोटो : LKO CITY

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