राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान के कवि सम्मेलन में कवियों ने हास्य के साथ प्रेम रस की बौछारों से भिगोया
लखनऊ। दर्द का आंकलन नहीं होता, इसमें कोई चयन नहीं होता, प्यार में डूबना ही पड़ता है, प्यार में आचमन नहीं होता...। कवयित्री सोनरूपा विशाल ने जब प्यार की परिभाषा को एक और पहचान देती इन पंक्तियाें को सुनाया तो तालियां गूंज उठी। मौका था राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उप्र की ओर से उर्दू अकादमी में शनिवार को आयोजित कवि मंच-2021 का, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से हंसाया, गुदगुदाया। हास्य रस, प्रेम रस, देशभक्ति रस से मंच को सराबोर किया। समारोह के अतिथि अध्यक्ष राज्य लोक सेवा अधिकरण सुधीर सक्सेना और न्यायाधीश उच्च न्यायालय राकेश कुमार श्रीवास्तव रहे।
संस्थान की पत्रिका अपरिहार्य के विमोचन के बाद कवि सम्मेलन की शुरुआत संस्थान की महामंत्री डॉ. शोभा दीक्षित भावना ने वाणी वंदना से की। डॉ. दिनेश चंद्र अवस्थी ने प्रेम की कविताओं समेत आलू की हंसाती गुदगुदाती कविताएं सुनाईं। संस्थान के अध्यक्ष सीनियर आईएएस डॉ. हरिओम ने जिन्हें उगानी थी तालीम ओ तरक्की की फसल, लगे हैं वो जहालत की खेतीबारी में... रचना से मौजूदा दौर का हाल बयां किया। गायिका व कवयित्री डॉ. मालविका हरिओम ने जहां बारिश जरूरी है, वहां बादल नहीं जाता... रचना सुनाई। संचालन कर रहे सीनियर आईएएस डॉ. अखिलेश मिश्रा ने मैं तुमसे प्यार करूंगा क्या कर लोगी तुम... से प्यार की अठखेलियां सुनाई तो शहबाज तालिब ने दूर होकर भी जिंदा हो, तुमको शर्मिंदगी नहीं होती... के अलावा कई शेर सुनाये। हास्य कवि सर्वेश अस्थाना ने राजनीति पर कटाक्ष करती रचनाएं सुनाईं। गिरगिट की नेता से तुलना न करना... पर तालियां बजवाई। पंकज प्रसून ने वैलेेंटाइन डे और क्वारंटाइन से अपनी काव्य यात्रा शुरू की। मिडिल क्लास वाले टीवी देखो, तुमको मिली डिबेट पर तालियां भी बजवाई, हंसाया। कवि सम्मेलन में गोरखपुर के कलीम कैसर, दिल्ली के सर्जन डॉ. अरुण पांडेय, हरी प्रकाश हरि, प्रयागराज के शैलेष गौतम ने भी कविताओं से शौकीनों को बांधे रखा। समारोह में संस्थान के उपाध्यक्ष इं. सुनील कुमार वाजपेयी, संगठन मंत्री डॉ. रश्मिशील, विजय प्रसाद त्रिपाठी, मानस मुकुल त्रिपाठी, इंद्रासन सिंह इंदु, भोजपुरी कवि कृष्णानंद राय, अनुपम आनंद, प्रचार मंत्री सीमा गुप्ता समेत तमाम कवि मौजूद रहे।