शराब की दुकानों के आवंटन के लिए पहले चरण की ई-लॉटरी प्रक्रिया फेल होने के पीछे आबकारी विभाग, एनआईसी और पंजाब नेशनल बैंक के बीच आपसी तालमेल के अभाव को ही मुख्य वजह बताया जा रहा है।
वहीं इन तीनों ने ई-लॉटरी प्रक्रिया के फेल होने का ठीकरा एक-दूसरे के सिर फोड़ना शुरू कर दिया है।
बैंक प्रबंधन का कहना है कि एनआईसी और आबकारी विभाग के स्तर पर की गई जल्दबाजी के चलते ई-लॉटरी नहीं हो सकी। वहीं, एनआईसी के सूत्र कहते हैं कि न तो कोई तकनीकी गड़बड़ी रही और न ही सर्वर ही फेल हुआ था।
पूरी प्रक्रिया के लिए कम समय दिया जाना और पीएनबी द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले पेमेंट डाटा का मैच न होना मुख्य कारण रहा।
शराब की दुकानों के आवंटन के लिए गुरुवार को होने वाली ई-लॉटरी प्रक्रिया फेल हो जाने के बाद आबकारी विभाग जहां तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार बता रहा है, वहीं सत्ता के गलियारों में इसकी जड़ में शराब कारोबार के एक बड़े सिंडिकेट की भूमिका होने की चर्चा है।
हालांकि शुक्रवार को एनआईसी, आबकारी विभाग और पीएनबी द्वारा अपने-अपने स्तर पर की गई समीक्षा में अधिकारियों और ई-लॉटरी प्रक्रिया में शामिल पीएनबी, आबकारी विभाग और एनआईसी के बीच आपसी तालमेल का अभाव सामने आया है।
आबकारी विभाग के उच्चाधिकारी की मानें तो प्रक्रिया तय करने के शुरुआती दौर से ही वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तालमेल का अभाव दिखने लगा था। इसका ही नतीजा रहा कि गुरुवार सुबह तक जिला आबकारी अधिकारी के स्तर पर आवेदनों के परीक्षण का काम ही पूरा नहीं हो पाया था।
इसकी वजह यह बताई जा रही है कि आवेदन भरने से लेकर ई-लॉटरी तक की प्रक्रिया और तिथि तय करने को लेकर सभी स्तर से मिले सुझावों को दरकिनार कर दिया गया।
आनन-फानन में लॉटरी की तिथि घोषित कर दी गई, जबकि इससे पहले की कई प्रक्रिया पूरी ही नहीं हो पाई थी। आवेदन व प्रोसेसिंग फीस जमा करने के लिए बार-बार तिथि तो बढ़ाई गई, लेकिन उसे अपडेट करने के लिए समय नहीं दिया गया।
लिहाजा गुरुवार रात करीब 8 बजे तक जिला आबकारी कार्यालयों से सत्यापित आवेदन एनआईसी को मिलते रहे। ऐसे में सॉफ्टवेयर पर आवेदकों का पूरा विवरण अपलोड होने में काफी समय लग गया।