प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र के जिस जयापुर गांव को ‘आदर्श गांव’ बनाना चाहते हैं उस गांव की मौजूदा तस्वीर बेहद निराश करने वाली है। लगभग 4200 की आबादी वाले इस गांव में न तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है और न ही शौचालय। स्कूल के नाम पर महज एक प्राथमिक पाठशाला है।
चार किलोमीटर के दायरे में फैले गांव के 80 फीसदी लोग साक्षर हैं। बावजूद इसके नागरिक सुविधाओं की हालत यहां खस्ता है। बिजली, पीने के लिए साफ पानी, नाली, संपर्क मार्ग कुछ भी नहीं है इस गांव में। जो थोड़ी-बहुत सुविधाएं हैं भी तो चंद लोगों के निजी प्रयास से और उन्हीं के लिए हैं।
आराजीलाइन ब्लाक के इस गांव की प्रधान हैं दुर्गावती देवी। यह उनका दूसरा कार्यकाल है। हालांकि प्रधानी का सारा कामकाज उनके देवर श्रीनारायण पटेल ही संभालते हैं।
कुर्मी बहुल इस गांव में परिवहन की भी कोई सुविधा नहीं है। खेत की सिंचाई के लिए लोग निजी संसाधनों से पानी का जुगाड़ करते हैं। यहां एक भी सरकारी नलकूप नहीं है।