नीति आयोग के एक अधिकारी ने ‘अमर उजाला’ को फोन पर बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट राज्य के वित्त विभाग में उलझा हुआ है। आयोग के सदस्य डॉ. वीके सारस्वत ने 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है। इसमें प्रोजेक्ट के प्रस्ताव से क्रियान्वयन के लिए अब तक की गई कार्यवाही की जानकारी दी गई है। यह भी बताया गया है कि प्रदेश सरकार के इस संबंध में किए जा रहे प्रयासों को प्रधानमंत्री ने खुलकर सराहा है। मोदी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लखनऊ में कृषि कुंभ मेले के उद्घाटन मौकेपर किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बताने व प्रदेश सरकार के ‘कूड़ा से कंचन’ बनाने के प्रयास की सराहना का खास तौर से उल्लेख किया है। सारस्वत ने मुख्यमंत्री से पायलट प्रोजेक्ट केलिए 26.50 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दिलाने के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित करने का आग्रह किया है।
योजना के तहत वाराणसी, गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया और देवरिया जिले के 20 हजार परिवारों में मेथेनॉल कुक स्टोव वितरित किए जाने हैं। इसके अलावा मेथेनॉल आधारित इंजन निर्माण सहित कृषि अपशिष्टों से मेथेनॉल उत्पादन से जुड़ी नवीनतम सस्ती तकनीक उपलब्ध कराने के लिए आईआईटी बीएचयू से हाथ मिलाने की बात शमिल है।
आकस्मिकता निधि से बन सकती है बात
वित्त वर्ष 2018-19 के दूसरे अनुपूरक बजट में भी इसकेलिए पैसे की व्यवस्था न होने से लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना का लागू हो पाना टेढ़ी खीर माना जा रह है। हालांकि सरकार चाहे तो राज्य आकस्मिकता निधि से बजट की व्यवस्था कर योजना शुरू कर सकती है।