लखनऊ। लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता इंद्र देव सिंह की हत्या पांच बीघा जमीन पर हो रही प्लॉटिंग के कारण की गई थी। अधिवक्ता ने मड़ियांव स्थित अपनी जमीन पर प्लॉटिंग का काम बर्खास्त लेखपाल मन्नालाल गुप्ता को दी थी। इंद्र देव सिंह मन्नालाल पर भरोसा करते थे, लेकिन उसने उन्हें धोखा दिया।
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मन्नालाल की धोखाधड़ी पकड़े जाने के बाद इंद्र देव सिंह ने उससे नाराजगी जताई थी। मन्नालाल ने मोटी रकम हेरफेर की थी। चोरी पकड़े जाने के बाद मन्नालाल ने इंद्र देव सिंह को ही रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। मन्नालाल ने सुपारी देकर अधिवक्ता की हत्या करा दी।
बताया गया कि विक्रम यादव उर्फ कालिया ने 12 बोर के तमंचे से इंद्र देव सिंह को गोली मारी थी। अगस्त 2002 में हुए इस हत्याकांड ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई थी। हालांकि, अधिवक्ताओं की नाराजगी को देखते हुए तत्कालीन सपा सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सीबीआई जांच के बाद एफआईआर में नामजद लोगों के अलावा अन्य के नाम भी उजागर हुए। मंगलवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने तीन हत्या के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद से अब फैसले पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। तीन दोषियों में विक्रम यादव उर्फ कालिया, बृजेश यादव और पन्ना सिंह शामिल हैं। कोर्ट अब सात जुलाई को सजा सुनाएगी। खास बात ये है कि हत्या की सुपारी देने वाले मन्नालाल और उसके दो अन्य साथी छोटेलाल व वेद प्रकाश गुप्ता की मामले की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई थी।
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यह है मामला
आठ अगस्त 2002 को अधिवक्ता चैंबर से निकले थे। वह स्कूटर लेकर जा रहे थे। इसी दौरान एक युवक ने उनसे लिफ्ट मांगी। अधिवक्ता ने उसे लिफ्ट दी। थोड़ी दूर आगे जाने के बाद शूटर ने अधिवक्ता को गोली मार दी। गोली लगने से इंद्र देव सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। अधिवक्ता की पत्नी नयनतारा सिंह ने एफआईआर कैसरबाग थाने में दर्ज कराई थी।