जलिस को खिताबत करते अब्बास इरशाद नकवी
लखनऊ। हुसैनी अकादमी की ओर से सआदतगंज स्थित रौजा-ए-काजमैन में कदीम खम्सा-ए-मजालिस का आयोजन किया गया। पहले दिन मौलाना सैय्यद अब्बास इरशाद नकवी ने कहा कि दौर-ए-गैबत में ईमान की मजबूती और सही राह पर कायम रहने के लिए मारिफत बेहद जरूरी है। इंसान जब अपने इमाम की पहचान और उनकी तालीमात से जुड़ा रहता है, तभी गुमराही से बच सकता है।
''दौरे गैबत और अहमीयत-ए-मारिफत'' विषय पर उन्होंने कहा कि अहलेबैत की सीरत इंसानियत, इंसाफ, सब्र और तकवा का पैगाम देती है। मौजूदा दौर में समाज को इन्हीं उसूलों पर चलने की जरूरत है। उन्होंने मोमिनीन से कुरआन और अहलेबैत की शिक्षाओं पर अमल करने की अपील की।
मजलिस की शुरुआत कारी नदीम साहब की तिलावत-ए-कुरआन से हुई। इसके बाद नात, मनकबत और सोजख्वानी पेश की गई। आयोजकों ने बताया कि कदीम खम्सा-ए-मजालिस का सिलसिला पांच जुलाई तक रोजाना रात 8:30 बजे जारी रहेगा। अंतिम मजलिस में कर्बला की जियारत के लिए मोमिनीन के बीच कुराअंदाजी भी कराई जाएगी। जीशान अब्बास नकवी, दरगाम हैदर, मौलाना सकलैन आब्दी, एएच रिजवी, वजीर अब्बास मौजूद रहे। अंत में शोहदा-ए-कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करते हुए मातम और दुआ कराई गई।