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राष्ट्रनायकों पर तैयार हों नाटक, हर जिले में हो मंचन : योगी

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समारोह में हुआ कलाकारों का सम्मान और गूंजी प्रस्तुतियों की ध्वनि। 
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लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के आठ दिवसीय स्वर्ण जयंती समारोह का शुभारंभ करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे असली राष्ट्र नायकों को वोट बैंक के चक्कर में भुला दिया गया था, उनके बारे में नई पीढ़ी और आमजन को बताने की जरूरत है। इसके लिए राष्ट्र नायकों के जीवन पर सशक्त पटकथा, संगीत व संवाद के साथ नाटक तैयार करें और इनका मंचन हर जिले में स्कूलों-कॉलेजों तक में हो जिससे नई पीढ़ी गुमनाम महापुरुषों के बारे में जान सके।
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गोमतीनगर स्थित बीएनए में आयोजित समारोह के पहले दिन रविवार को मुख्यमंत्री ने नवीनीकृत राज बिसारिया प्रेक्षागृह का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने वीरांगना अवंतीबाई, झलकारीबाई, ऊदा देवी, महाराज बिजली पासी, पं. रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद आदि नायकों के किस्से सुनाए और कहा कि नाट्य अकादमियों का दायित्व है कि इन पर लघु नाटक तैयार करें। स्थानीय स्तर पर विद्यालयों में सप्ताह में एक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों, लोककलाओं को बढ़ाने का कार्यक्रम होना चाहिए।

12 अप्रैल तक चलने वाले स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि रंगमंच वही है, जहां पर भावनाएं शब्द बनती हैं, शब्द अभिनय बनते हैं और यही अभिनय जनचेतना बनकर समाज को नई दिशा देते हैं। सीएम ने संस्कृति विभाग व अकादमी से कहा कि राष्ट्रभक्ति से जुड़े नाटक करें। सीएम योगी ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी के प्रणेता थे। काशी नागरी प्रचारिणी सभा आधुनिक हिंदी की जननी रही है। कहा, संस्कृति विभाग को काशी नागरी प्रचारिणी के पुनरुद्धार पर भी सोचना चाहिए। उन्होंने भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटक अंधेर नगरी व भारत दुर्दशा के साथ ही जयशंकर प्रसाद के नाटक स्कंदगुप्त व चंद्रगुप्त का भी जिक्र किया। सीएम ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ पर आधारित नाट्य मंचन की प्रस्तुति देखी और प्रशंसा भी की। कहा कि इस नाटक की अवधि 15 मिनट की बजाय दो घंटे होनी चाहिए। सीएम ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से तैयार किए गए सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य की भी तारीफ की और कहा कि शुक्रवार को उन्हें वाराणसी में इसे देखने का अवसर प्राप्त हुआ।
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भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी और निदेशक बिपिन कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ल, भातखंडे संस्कृति विवि की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, एसीएस अमृत अभिजात समेत अनेक रंगकर्मी और पूर्व छात्र मौजूद रहे।

बीएनए को मिला 40 कमरों का छात्रावास
बीएनए अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी ने बताया कि संस्कृति विभाग की ओर से शहीद पथ पर 40 कमरों के एक छात्रावास को मंजूरी मिल गई है जिसके लिए हम मुख्यमंत्री के आभारी हैं। उन्होंने कहा कि हमारे यहां छात्रों की संख्या केवल 20 है, इसे बढ़ाने के साथ ही स्टॉफ की स्वीकृति भी मिल जाएगी तो संस्थान प्रगति के पथ पर आगे बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे यहां कर्मचारियों को सेवानिवृत्त पर ग्रेच्युटी के नाम पर कुछ नहीं मिलता है, अगर यह व्यवस्था हो जाए तो कर्मचारियों के परिवार जीवन भर आपके ऋणी रहेंगे। मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर आश्वासन देते हुए कहा कि आप प्रस्ताव बनाकर भेजें और संस्कृति विभाग उचित कार्रवाई करे।

24 से दिनकर की कृतियों पर तीन दिवसीय आयोजन

सीएम ने कहा कि सदन में मैं रामधारी सिंह दिनकर की कविताओं की पंक्तियों का अक्सर जिक्र करता हूं। उनकी रचना ‘सिंहासन खाली करो, जनता आती है’ ने आपातकाल के दौरान समाज की जनचेतना को जागरूक किया। सीएम ने बताया कि दिनकर की कृतियों पर आधारित तीन दिवसीय कार्यक्रम 24 अप्रैल से लखनऊ में होगा। एक दिन अटल जी की साहित्यिक कृतियों पर आधारित रंगमंच का कार्यक्रम भी होना चाहिए।

महाराज सुहेलदेव को भुला दिया था, माफिया था सालार मसूद : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराज सुहेलदेव ने सालार मसूद को जिस तरह से मारा, उस कारण 150 वर्ष तक भारत पर कोई विदेशी आक्रांता भारत पर हमला करने का दुस्साहस नहीं कर सका लेकिन भारतीय समाज ने उन्हें भुला दिया। सालार मसूद भी माफिया था। जिस जगह सुहेलदेव ने सालार मसूद को मारा, वहां उसके नाम पर मेला लगता था, लेकिन महाराज सुहेलदेव का स्मरण कोई नहीं करता था। एक हजार वर्ष बाद हमारी सरकार के प्रयास से सुहेलदेव का स्मारक बना और आज वहां लाखों लोग जुटते हैं। सीएम ने कहा, महाराजा सुहेलदेव ने सालार मसूद को वह मौत मारा, जिसे इस्लाम में सबसे खराब मौत मानी जाती है। जब तक अत्याचारी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करेंगे, तब तक वह भारत की संस्कृति पर प्रहार करता रहेगा।

समारोह में हुआ कलाकारों का सम्मान और गूंजी प्रस्तुतियों की ध्वनि। 

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