समाज के बनावटीपन और ढपोरशंख पर आज भी कटाक्ष करती मुंशी प्रेमचंद की कहानी सद्गति के मंचन ने सोमवार को दर्शकों को झकझोरा। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में नाटक सद्गति के मंचन ने समाज में इसी ओछेपन मंच पर उतारा।
मंच पर आजम खान, मीना सोंधी, निधि, मयंक, सीमा, संतोष समेत तमाम किरदार उतरे। कहानी में दिखाया गया कि पंडित से बेटी केलग्न का मुहूर्त पूछने गया नीची जाति का दुखी पंडित जी केघर इतना काम करता है कि लकड़ी चीरते-चीरते उसकी जान निकल जाती है।
बाद में उसकी लाश को खुद पंडित जी रस्सी से बांधकर गांव के बाहर फेंक आते हैं। मीना सोंधी के निर्देशन में लकड़ी चीरने वाले दृश्य को सजीव बनाने के लिये बाकायदा कलाकार ने मंच पर असली कुल्हाड़ी और लगभग आधा क्विंटल वजनी लकड़ी के टुकड़े पर कुल्हाड़ी चलाई। मंचन सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी की ओर से हुआ। सोसाइटी की महासचिव सीमा मोदी ने बताया कि मंगलवार को मोटेराम का सत्याग्रह नाटक का मंचन होगा।