पर्यावरण अगर बचाना है और ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को कम करना है। तो हमें पेड़-पौधों को कटने से रोकना होगा।
साइंस सिटी में नेशनल साइंस ड्रामा कॉम्प्टीशन की स्कूलस्तरीय प्रतियोगिता में 16 स्कूलों से आए बच्चों ने जहां अंधविश्वास पर विज्ञान की मदद से प्रहार किया।
वहीं, ‘हमें मत काटो’ समेत कई नुक्कड़ नाटक से पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया।
ग्रीनहाउस इफैक्ट में लखनऊ पब्लिक स्कूल सहारास्टेट के बच्चों ने प्रदूषण से बढ़ रहे खतरे को सामने रखा। बच्चों ने समझाया कि अगर पर्यावरण की रक्षा नहीं की गई तो इसकी सजा धरती के विनाश के रूप में हमें भुगतनी होगी।
सेंट जोसेफ कॉलेज राजाजीपुरम के बच्चों ने पेड़ों में कील ठोंककर उन्हें खत्म करने से रोकने की अपील की। बच्चों ने नाटक ‘कीलों वाले बाबाजी’ से संदेश दिया कि ऐसा करने से पेड़ों को नुकसान पहुंचता है।
इससे पहले ड्रामा फेस्टिवल का उद्घाटन भारतेंदु नाट्य अकादमी के पूर्व निदेशक सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ ने किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि विज्ञान का संदेश पहुंचाने के लिए नाटक ही सबसे अच्छा माध्यम है।
इससे अंधविश्वास, बालश्रम, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे मुद्दों को बखूबी निशाना बनाकर इनके समाधान के लिए जागरूकता पैदा की जा सकती है।
परियोजना संयोजक उमेश कुमार ने बताया कि अगला चरण नेशनल साइंस सेंटर दिल्ली में विजयी टीमों के साथ दिसंबर में होगा।
ये रहे विजेता
ज्यूरी डॉ. एसके ग्रोवर, पूर्व उप महानिदेशक दूरदर्शन दिल्ली, डॉ. आनंद अखिला पूर्व वैज्ञानिक सीमैप, मृदुला भारद्वाज सचिव एनआईपीए ने प्रथम विजेता ब्राइटलैंड इंटर कालेज त्रिवेणीनगर, द्वितीय विजेता सूर्या पब्लिक स्कूल सुल्तानपुर रोड और तृतीय विजेता लखनऊ पब्लिक स्कूल राजाजीपुरम को चुना।