हजरत अली की याद में गुरुवार को ईद-ए-गदीर मनाई जाएगी। मस्जिदों में होने वाली नमाज व जलसों की तैयारियां बुधवार को पूरी कर ली गई है।
उधर, घरों में भी नज्र का इंतजाम किया गया। साथ ही दरगाह हजरत अब्बास पर नज्र-ए-मौला के आयोजन किया जाएगा।
पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब द्वारा आखिरी हज की वापसी पर हजरत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसी की याद में गुरुवार को सुबह 11 बजे शिया समुदाय 110 मस्जिदों में एक साथ ईद-ए-कदीर की नमाज अदा करेंगे।
सबसे बड़ी नमाज रौजा-ए-काजमैन स्थित मस्जिद-ए-कूफा में मौलाना अबू इफ्तेखारी की इमामत में आयोजित होगी। इसके बाद यहां सफीर-ए-हुसैनी कमेटी की ओर से जश्न-ए-महफिल सजेगी।
मौलाना मुसय्यब हुसैन ने बताया कि 18 जिलहिज को पैगंबर-ए-इस्लाम ने आखिरी हज से वापसी करते हुए गदीर के मैदान में मौला-ए-कायनात हजरत अली को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था।
इसलिए इसे ईद-ए-गदीर के नाम से सारी दुनिया में मनाया जाता है।
जश्न-ए-हजरत अली मनाया
रुस्तम नगर स्थित रौजा-ए-बैतुल हुज्न में जश्न-ए-हजरत अली मनाया गया। इस अवसर पर मौलाना मीसम जैदी ने जश्न-ए-महफिल को संबोधित करते हुए हजरत अली और उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
मौलाना ने कहा कि रसूल-ए-खुदा के दामाद व चचेरे भाई के उत्तराधिकारी चुने जाने का अरब में काफी विरोध हुआ, लेकिन अल्लाह की मर्जी के आगे किसी की न चली।
रसूल के बाद सत्ता से दूर रह कर भी हजरत अली अलैहिस्सलाम ने इस्लाम की नींव को मजबूती दी और इस्लामी इंसाफ को कायम रखा। सआदतगंज में हैदर साहब के आवास पर महफिल का आयोजन किया गया।
यहां महिलाओं ने जश्न को संबोधित कर मौला अली की शान में अपने कलाम पेश किए। उधर, हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से शहर के कई अजाखानों में जश्न-ए-गदीर मनाया गया।