व्यंग्य नाटक, बॉलीवुड डांस और मूक अभिनय की जुगलबंदी गुरुवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में देखने को मिली।
द रिचमंड फेलोशिप सोसाइटी व दिव्य सांस्कृतिक शैक्षिक सामाजिक संस्था की ओर से आयोजित नाट्य व नृत्य कार्यशाला का समापन हुआ।
पद्मश्री साहित्यकार केपी सक्सेना के लिखे नाटक ‘लालटेन की वापसी’ का मंचन किया गया।
कहानी शुरू होती है बुजुर्ग क्लर्क से टकरा जाती है, जिसमें उसका चश्मा गुम हो जाता है। बुजुर्ग चश्मा बनवाने जाती है, डॉक्टर के पास इत्तेफाक से वही चश्मा मिल जाता है।
निर्देशन अंकुर सक्सेना ने किया। इसके बाद नाटक ‘भारत आगे बढ़ाओ’ के मंचन के दौरान यह सवाल उठाया गया कि बात आगे बढ़ने की हो रही है, लेकिन कहीं हम पीछे तो नहीं जा रहे हैं।
लेखन ज्ञान चतुर्वेदी व रूपांतरण अनवर बेग का रहा। निर्देशन संजय त्रिपाठी ने किया।
नाटकों में ममता यादव, ज्योति वर्मा, ज्योति कश्यप, अनिता खन्ना, लालमणि पटेल, जूही दुक्ताल, प्रतीक श्रीवास्तव, सोमेश चंद्र उप्रेती ने अभिनय किया।
इससे पूर्व कलाकार अमरेश कुमार श्रीवास्तव ने मूक अभिनय कर बताया गया कि किसी भी परिस्थिति में हम अकेले खुद को सहज महसूस नहीं कर पाते हैं।
इसी प्रकार मानसिक रोग से ग्रसित व्यक्ति को भी उसके माता-पिता, मनोचिकित्सक, दोस्तों और समाज के सभी लोगों का साथ चाहिए होता हैं ताकि वे खुद को संभाल सके।