भगवान बुद्ध के जीवन की तीन घटनाओं पर आधारित नाटक ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ का मंचन सोमवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में चल रहे बहुजन नाट्य समारोह में हुआ।
पहली घटना में भगवान बुद्ध दलितों व अछूतों को भिक्षु संघ में शामिल करते हैं। दूसरी घटना में वे महा प्रजाति गौतमी व यशोधरा 500 शाक्य स्त्रियों को भिक्षु संघ में शामिल कर उन्हें समानता का अधिकार देते हैं।
तीसरी घटना में उन्होंने हिंसा के मार्ग पर चल रहे अंगुली माल को अहिंसा का मार्ग दिखाया। सम्यक नाट्य संस्थान व भारतीय बहुजन नाट्य अकादमी की ओर से मंचित नाटक में कलाकारों का अभिनय ठीक ठाक रहा।
लेखन व निर्देशन श्याम कुमार का रहा। समारोह के चौथे और अंतिम दिन मंगलवार को सेमिनार और सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।