प्लास्टिक के कप, प्लेट बंद हो गए हैं। ऐसे में बांस, मकई और धान की भूसी से तैयार कप, ग्लास, प्लेट आदि इसका बेहतर विकल्प बन सकते हैं। प्लास्टिक की जगह अब नारियल के पत्ते की बनी स्ट्रॉ भी आ गई है। रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन कॉन्क्लेव के मौके पर लगी प्रदर्शनी में यह सब देखने को मिला। यहां कई प्रदेशों से आई कंपनियों ने अपने ऐसे ही उत्पादों को प्रदर्शित किया।
कैरी बैग बनाने केलिए बांस के दाने
उत्तराखंड से आए अनुभव मित्तल की बायो क्राफ्ट इनोवेशन कंपनी बांस के दानों से प्लेट, कटोरी, चम्मच, कैरी बैग आदि बनाती है। उन्होंने बताया कि जिस तरह प्लास्टिक के दानों से निर्माण किया जाता है, उसी तरह बांस के दानों से भी किया जा सकता है। यह 350 रुपये किलो है। जो दाने बनाए गए हैं, उसमें 60 प्रतिशत बांस और चालीस प्रतिशत अन्य सामग्री है।
धान की भूसी से बनी गिलास-कटोरी
बरेली के रोहन ने धान की भूसी से बने कप, प्लेट, चम्मच, गिलास, कटोरी आदि का स्टॉल लगाया था। उनका कहना था कि अभी यह काम शुरू किया है। अभी एक प्लेट करीब आठ रुपये की पड़ रही है, मगर जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ेगा यह सस्ती हो जाएगी। यह पर्यावरण के अनुकूल है, दो महीने में गल जाती है।
दस हजार में बना दिया प्लास्टिक का ठेला
प्रदर्शनी में पॉलिथीन के कचरे से बनाया गया एक ठेला भी प्रदर्शित किया गया। जिसमें ठेले की फर्श लकड़ी की जगह प्लास्टिक से बनाई गई थी। इसकी लागत करीब दस हजार रुपये है।
नारियल के पत्ते से बना स्ट्रॉ
बंगलुरू की एक कंपनी नारियल के पत्ते से स्ट्रॉ और पेन बना रही है। कंपनी की ओर से इसका स्टाल भी लगाया गया है। कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि अभी उसकी बिक्री ऑनलाइन ही हो रही है।
एल्युमिनियम की बोतल में आएगा दूध
महाराष्ट्र से आई एक संस्था की ओर से एल्युमिनियम की बोतल की प्रदर्शनी लगाई गई थी। उनका कहना था कि वह दूध डेयरी वालों से संपर्क कर बोतल उपलब्ध करा रहे हैं। यह किराए पर दी जा रही हैं और एक रुपये प्रति लीटर का किराया लिया जाता है। लखनऊ की दूध डेयरियों से भी इसके लिए संपर्क किया जाएगा।