केजीएमयू ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि प्लाज्मा डोनेशन पूरी तरह सुरक्षित है। डोनेशन करने वाले को किसी तरह का खतरा नहीं होता है। जो लोग कोरोना से ठीक हो गए हैं वे प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं।
दानदाता का ब्लड प्लाज्मा फेरेसिस मरीज में जाता है। इसमें सिर्फ वही ब्लड लिया जाता है जिसमें कोरोना संक्रमण से लड़ने की एंटीबाडी होती है। हर व्यक्ति के शरीर में पांच से छह लीटर खून होता है, जबकि प्लाज्मा सिर्फ 400 से 500 मिलीलीटर लिया जाता है। ऐसे में डोनेट करने वाले व्यक्ति का खून शुद्ध करके फेरेसिस मरीज के जरिए फिर से उसके शरीर में चला जाता है।
प्लाज्मा थेरेपी का पहला प्रयोग केजीएमयू में
प्रदेश में प्लाज्मा थेरेपी का पहला प्रयोग केजीएमयू में किया गया। इसके बाद 12 मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का ट्रायल भी हुआ। अब तक 20 से अधिक अन्य मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी जा चुकी है, जबकि 45 लोग डोनेशन कर चुके हैं।