पौधों में जलवायु परिवर्तन को महसूस कर उसके मुताबिक खुद को ढालने की महत्वपूर्ण क्षमता है। इससे वैज्ञानिक इस दिशा में नए शोध कर व्यापक हित में काम कर सकते हैं।
यह जानकारी शुक्रवार को एनबीआरआई में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के कार्यक्रम में आयोजित प्रो. केएन कौल व्याख्यान में यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, बंगलुरू के भूतपूर्व प्रोफेसर केएन गणेशैया ने कहा कि पौधे भी जंतुओं की भांति बर्ताव करते हैं। पौधों में आंख, नाक और कान जैसे अंग न होने के बाद भी अपने आस-पास के वातावरण को समझने की संवेदी शक्ति होती है। इसके आधार पर वह स्वयं को वातावरण के अनुरूप ढालते हैं। उसके मुताबिक बर्ताव करते हैं। पौधे हमारी ही तरह आस पास के माहौल से संकेतों को ग्रहण करते हैं। उनसे आवश्यक सूचना प्राप्त करते हैं। उस सूचना के आधार पर आवश्यक निष्कर्ष निकालते हैं। उन निष्कर्षों के आधार पर अपने बर्ताव में परिवर्तन लाते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधि मंत्री ब्रजेश पाठक रहे। वहीं प्रो. कौल की बेटी दीपा कौल मौजूद रहीं। निदेशक डॉ. एसके बारिक ने डॉ. कौल के एनबीआरआई के लिए किए गए प्रयासों के बारे में मौजूद लोगों को बताया। इस दौरान 25 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारी, वैज्ञानिकों का सम्मान हुआ। वहीं प्रथम पुष्पांगदन बायोडाइवर्सिटी एक्सेस एंड बेनेफि ट शेयरिंग अवॉर्ड के विजेताओं की भी घोषणा की गई। यह पुरस्कार आदिवासी कल्याण के लिए किए गए विशिष्ट कार्य हेतु प्रदान किया जाता है।