सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव
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जीत के बाद अखिलेश ने दूसरे दलों को क्रेडिट देने में कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने देश की लड़ाई में बसपा के समर्थन के लिए मायावती का खासतौर से आभार जताया। उन्होंने रालोद अध्यक्ष अजित सिंह, एनसीपी, वामपंथी दलों, निषाद व पीस पार्टी समेत सभी दलों को बार-बार धन्यवाद दिया।
हालांकि इनमें से कुछ दलों का गोरखपुर, फूलपुर में नाममात्र का जनाधार है लेकिन विपक्षी दलों को जोड़ने की रणनीति के तहत अखिलेश ने सभी के प्रति सम्मान का भाव दिखाया। मायावती से मिलने के लिए उनके आवास पर जाना भी उनका बड़ा और साहसिक फैसला रहा।
सपा के सूत्रों के मुताबिक महागठबंधन के लिए जल्दबाजी नहीं की जाएगी। अभी कैराना लोकसभा सीट व बिजनौर जिले की नूरपुर विधानसभा सीट पर भी विपक्षी दल गठबंधन करके चुनाव में उतरेंगे। ये दोनों सीट पश्चिमी यूपी में हैं और भाजपा सांसद हुकुम सिंह व विधायक लोकेन्द्र सिंह के निधन से रिक्त हुई हैं। जिस तरह गोरखपुर में निषाद पार्टी व पीस पार्टी को अहमियत दी गई उसी तरह वेस्ट यूपी में रालोद को तवज्जो दी जाएगी।
हालांकि भारतीय समाज पार्टी प्रदेश में भाजपा की सहयोगी है और सरकार में भी शामिल है लेकिन गठबंधन के शिल्पकारों की नजरें पूर्वांचल में ओमप्रकाश राजभर पर भी हैं। राजभर प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री हैं लेकिन सरकार को असहज करने वाले बयान देते रहे हैं। गठबंधन में तमाम छोटे दलों को जोड़ने की योजना है लेकिन इसकी धुरी सपा और बसपा ही रहेंगे। इन दोनों के बीच सीट बंटवारे पर सहमति बनने के बाद ही गठबंधन को लेकर बातचीत शुरू होगी। महागठबंधन के खांचे में कांग्रेस की भी जगह है लेकिन आने वाला समय बताएगा कि यह अमली जामा पहन पाएगा या नहीं।