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कानपुर आईआईटी का विमान करेगा सीमा की निगरानी

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लखनऊ। आईआईटी कानपुर ने ऐसे हल्के मानव रहित विमान विकसित क रने में सफलता हासिल की है जिनका उपयोग सीमाओं की सर्विलांस के अलावा संकटग्रस्त इलाकों में दवाएं और खाना पहुंचाने में किया जा सकता है। इन प्रोटोटाइप विमानों की सफल उड़ानों के बाद अब रक्षा विभाग के अलावा गुजरात पुलिस और अन्य अर्धसैनिक बलों ने मांग की है। अब निजी कंपनियों की मदद से आईआईटी कानपुर इन विमानों का उत्पादन शुरू करेगा।
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एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी कानपुर की तरफ से ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-2 में इन विमानों का प्रदर्शन करने आए अभिजीत मोइत्रा ने बताया कि 25 किग्रा. में आर्य प्रो, 60 कि ग्रा. में अक्षत प्रो वजन के विमान विकसित किए गए हैं। सेना और पुलिस की जरूरत को देखते हुए इन विमानों को बैटरी से चलने के अलावा ईंधन से चलने वाला भी बनाया जा सकता है। हाइब्रिड मॉडल भी इसके विकसित किए जाएंगे जिससे दोनों तरह से इनका उपयोग हो सके।
आपदा के समय भी उपयोगी
विमान के विकास का हिस्सा रहीं डॉ. अलका द्विवेदी का कहना है कि सीमाओं की सुरक्षा के लिए सर्विलांस के अलावा आपदा के समय भी ये विमान उपयोगी होंगे। आपदा के समय मदद जैसे दवाएं, खाना पहुंचाने, निर्माण साइटों की निगरानी करने, वन संरक्षण के काम भी इससे किए जा सकते हैं। पांच किमी. की ऊंचाई तक से निगरानी के लिए ये विमान जरूरी उपकरणों से लैस हैं। रात में भी इनसे निगरानी की जा सकती है। इनको उडान भरने के लिए भी केवल 50 मीटर जगह की जरूरत होती है।
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सौर ऊर्जा से भी उड़ सकते
सर्विलांस के काम के लिए आईआईटी कानपुर ने सौर ऊर्जा से चलने वाले विमान सोलर यूएवी मराल-2 का विकास भी किया है। यह विमान सोलर पैनल से ऊर्जा पैदा करता है। इसे 200 किमी की रेंज में उपयोग किया जा सकता है। रात में उड़ान करने के अलावा लैंडिंग करने में भी यह सक्षम है। उड़ान के समय यह अपनी लोकेशन की सूचना भी देता रहेगा।
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