लखनऊ। सेंसर बोर्ड के चेयरमैन, लेखक और वरिष्ठ गीतकार प्रसून जोशी इन दिनों ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में हिस्सा लेने शहर आए हुए हैं। पिछले दिनों हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं को लेकर पत्र लिखने की बात हो या प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेना, सुर्खियों में बने रहने वाले प्रसून जोशी ने ‘अमर उजाला’ से एक खास बातचीत में देश के ताजा हालातों पर चर्चा की। पेश है उनसे बातचीत के चुनिंदा अंश।
सरकार को कमियां बताएं, कीचड़ न उछालें
सवाल- हाल ही में आपने प्रधानमंत्री को मॉब लिंचिंग के सिलसिले में पत्र लिखा, जो उन 49 जानी-मानी हस्तियों के पत्र के बाद आया, इसके बारे में आपकी प्रतिक्रिया।
जवाब : मेरा मानना है कि अगर कहीं सरकार की कमी नजर आई हो तो उसे ईमानदारी से बताना चाहिए, इस तरह केवल कीचड़ नहीं उछालना चाहिए। पहले भी दूसरी सरकारों में ऐसी घटनाएं हुईं जो निंदनीय थीं, तब ये लोग क्यों खामोश रहे। इनकी मंशा पर मुझे संदेह है। असहमति की भावना इससे ज्यादा मजबूत कभी नहीं रही।
लखनऊ में नजर आने लगा है ‘सिस्टम’
सवाल - ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी में आने का मकसद?
जवाब : उत्तरप्रदेश कला का बड़ा केंद्र हैं, यहां के कलाकारों और कहानियों का बॉलीवुड में खासा योगदान है। कुछ साल पहले देखें तो इतने समृद्ध साधनों के बावजूद इक्का-दुक्का फिल्में ही यहां शूट होती थीं। सिस्टम सुधरने का असर प्रदेश में दिख रहा है। बड़े फिल्मकार शूटिंग करने आ रहे हैं। अमिताभ बच्चन जैसी बड़ी हस्तियां यहां शूटिंग करके खुश हैं। दरअसल फिल्म एक बड़ा उद्योग है। जब आपके शहर, प्रदेश में शूटिंग होती है तो तमाम लोगों को रोजगार मिलता है। पर्यटन को बढ़ावा समेत कई फायदे हैं। मेरा प्रयास इसी सिलसिले को और आगे बढ़ाने का है। चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश फिल्मों का एक बड़ा हब बने।
विवादों से दूर का नाता
सीबीएफसी (सेंट्रल बोर्ड फॉर फिल्म सर्टिफिकेशन) के चेयरमैन अपने कार्यकाल को कैसा मानते हैं?
जवाब : हंसते हुए बोले ‘अब आप लोगों को वहां से मसाला नहीं मिल रहा होगा’। मुझसे पहले सेंसर बोर्ड में लगातार विवाद होते रहते थे। आप याद करके बताइए कि मेरे कार्यकाल में क्या आपको किसी विवाद की खबर मिली। मेरा मानना है कि हर मुश्किल का हल बातचीत से निकाला जा सकता है। किसी फिल्म में कुछ आपत्तिजनक लगा तो खुले दिल और दिमाग से मैंने बातचीत कर उसका हल निकाला।
नहीं चलेगी वेब पर अश्लीलता
सवाल : हाल ही में वेब सीरीज का बड़ा बाजार खड़ा हो गया हैं, जिसकी भाषा और कंटेट के बारे में सवाल उठ रहे हैं, इसे कैसे देखते हैं आप?
जवाब : बतौर फिल्म सेंसर बोर्ड के चेयरमैन, मेरा इसमें कोई दखल नहीं है। बतौर नागरिक मेरी राय जरूर हो सकती है। देखिए, हर बुरी चीज के खिलाफ समाज खुद रिएक्ट करना शुरू कर देता है। देश की संस्कृति और सभ्यता बनने में सदियां लगी हैं। किस तरह का एक-दूसरे के साथ व्यवहार करना है, किससे कैसी भाषा बोलनी है, क्या पहनना है, ये सब बचपन से हमको पता होता है। अब दो घंटे की फिल्में समाज और संस्कृति को नुकसान पहुंचाएंगी, इसमें मुझे संदेह है। हर नई चीज का एक शुरुआती क्रेज होता है। बस वही दौर ये वेब सीरीज भी एंजॉय कर रही हैं। मुझे विश्वास है कि समाज जल्द ही ऐसे अश्लील कंटेट को नकारना शुरू कर देगा।
बदल रहा है लखनऊ
सवाल : लखनऊ से आपका पुराना नाता है, क्या फर्क देखते हैं अब और कुछ साल पहले के शहर में।
जवाब : देखिए, बदलना प्रकृति का नियम है और यह जरूरी भी है। लखनऊ बहुत सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ रहा है। जैसे ही आज मैं एयरपोर्ट पर उतरा, मुझे वहीं से एक सिस्टम नजर आया। रास्ते भर देखता आया, मेट्रो ट्रेन भी दिखी, मगर सब कुछ बहुत ‘ऑर्डर’ में, बहुत सुविधाजनक। यह स्वागत लायक है।
सवाल : फिल्मों में क्या नया कर रहे हैं?
जवाब : ‘अभी मणिकर्णिका की सफलता को एंजॉय कर रहा हूं। अलग-अलग क्षेत्रों में व्यस्तता इतनी ज्यादा हो गई कि फिल्मों के लिए कम वक्त निकाल पा रहा हूं। वैसे तीन-चार फिल्मों की स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है जिसमें एक म्यूजिक लीजेंड की जिंदगी पर है। चाहता हूं कि इस फिल्म में खूब सारे गाने हों।