आश्विन अमावस्या पर मंगलवार को घरों में जजमानों ने अज्ञात तिथि को मृत्यु पाए पितरों का श्राद्ध किया। दिन में जजमानों ने अमावस्या को मृत्यु पाए पितरों के साथ ही अज्ञात तिथि को मृत्यु पाए पितरों का श्राद्ध किया, वहीं कई जजमानों ने पितरों को विदा भी किया।
श्राद्ध तर्पण के बाद नदी किनारे जाकर घाटों पर पितरों का विसर्जन किया। सुबह से दोपहर तक नदी के किनारे घाटों पर लोगों ने पितरों का विसर्जन किया जबकि कई बुधवार को सुबह ही पितरों को विदा करेंगे।
इसी के साथ पितृपक्ष की समाप्ति के बाद लोग शारदीय नवरात्र की तैयारियों में जुटेंगे। डालीगंज निवासी पंडित कृष्णकांत ने बताया कि अमावस्या के दिन से पितर स्वत: ही घरों से विदा होने लगते हैं।
पुन: द्वार खुलने तक (दीपावली तक) नदियों के किनारे और तीर्थों के आसपास ही विचरते रहते हैं। सुबह घरों में लोगों ने अमावस्या के श्राद्ध, तर्पण के बाद पितरों को पिंड दान-पूजन कर उनसे क्षमायाचना की।
इसके बाद कुछ जजमानों ने पितरों का विसर्जन किया। चौक के कुड़ियाघाट पर पितृ विसर्जन के लिए पहुंचे लोग घाटों पर गंदगी से परेशान रहे।
गायत्री परिवार की ओर से इंदिरानगर में तड़के सामूहिक तर्पण-विसर्जन हुए। परिवार के उमानंद शर्मा ने बताया कि मंगलवार को सुबह करीब 126 जजमानों से अपने पितरों का श्राद्ध किया। बुधवार को पितरों का विसर्जन करेंगे।
शहीद पितरों का विसर्जन
कर्तव्या फाउंडेशन की ओर से पितृ विसर्जन के अवसर पर बुधवार को शहीद पितरों का श्राद्ध हुआ। आयोजन से जुड़े डॉ. हरनाम सिंह ने बताया कि शहीद स्मारक पर आयोजित समारोह में लगभग 200 से अधिक लोगों ने ज्ञात-अज्ञात शहीद पितरों को याद किया और उनका सामूहिक विसर्जन किया।
मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता हृदय नारायण दीक्षित, उदय खत्री समेत तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।