उड़ीसा के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पीसी महापात्रा ने कहा है कि महिलाओं पर सेक्स की गोलियों का कोई असर नहीं होता है। यह गलतफहमी है कि दवाओं से महिलाओं की सेक्स क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।
डॉ. महापात्रा फेडरेशन आफ आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (फाग्सी) व कानपुर आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी (कोग्स) सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित नेशनल कांफ्रेंस ऑफ आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी व 27वीं राज्य कांफ्रेंस (यूपीकोग) में विचार रख रहे थे।
उन्होंने कहा दस फीसदी मामलों में सही तरीके से सेक्स न करने और जिस समय महिलाओं में अंडे बनते हैं (पीरियड के दूसरे हफ्ते में) उस समय सेक्स न करने से बच्चे नहीं होते हैं।
शादी से पहले कंट्रासेप्टिव पिल्स (गर्भधारण रोकने के लिए महिलाओं द्वारा 72 घंटे में खाई जाने वाली गोली) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इससे शादी के बाद गर्भधारण में दिक्कत हो रही है।
इस मामले है पश्चिम यूपी बदनाम...
एम्स भोपाल की डॉ. रागिनी मेहरोत्रा, एम्स नई दिल्ली की डॉ. नूतन अग्रवाल, डॉ. सोनिया मलिक, डॉ. अमिता, डॉ. एलके पांडेय, समेत कई डॉक्टरों ने अपने अनुभव साझा किए।
इस दौरान डॉ. मीरा अग्निहोत्री, डॉ. किरन पांडेय, डॉ. मधु लुंबा, डॉ. मनीषा अग्रवाल, डॉ. विनीता अवस्थी आदि मौजूद रहीं।
वाराणसी की डॉ. निशा अग्रवाल ने कहा कि सीजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन से बच्चे पैदा करना) में अधिकतम सात से आठ हजार रुपये का खर्च आता है। इसमें दवाओं के साथ ही बेहोशी के डॉक्टर की भी फीस होती है।
लेकिन, अब लोग कितना ले रहे हैं सब जानते हैं। कांफ्रेंस में पीसीपीएनडीटी एक्ट के उत्तर प्रदेश के नोडल अधिकारी डॉ. रामाधार, डॉ. आरएन गोयल ने कहा कि गर्भ में भ्रूण के लिंग की जानकारी देने के मामले में पश्चिमी यूपी बदनाम है।
2011 की जनसंख्या के अनुसार एक हजार लड़कों पर बागपत में 841, नोएडा में 843, गाजियाबाद में 850, मेरठ में 852, बुलंदशहर में 854, आगरा में 861, मुजफ्फरनगर में 863, हाथरस में 865, झांसी में 866, मथुरा में 870 और कानपुर में 873 लड़कियां हैं।