हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सोमवार को मोहनलालगंज दरिंदगी मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग वाली पीआईएल दायर की गई।
इस पर 23 जुलाई को सुनवाई हो सकती है। यह याचिका पीपुल्स फोरम की संयोजक नूतन ठाकुर ने दायर की है।
याचिका में मृतका की तस्वीर को सोशल मीडिया पर प्रचारित न किए जाने संबंधी नियमों को अमल में लाए जाने की भी गुजारिश की गई है।
गौरतलब है कि कुछ सवालों को लेकर यूपी पुलिस ने खुलासे नहीं किये हैं, वहीं पुलिस की कार्यशैली से भी सवाल उठ रहे हैं अतः मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की जा रही है।
ये सवाल बना पुलिस की परेशानी
इसके अलावा पीड़ित के साथ ही आरोपी के परिवार के सदस्यों ने भी पुलिस के खुलासे पर अंगुली उठाते हुए सीबीआई से मामले की जांच कराने की मांग की है।
कुछ समाज सेवी संगठनों ने भी इसकी मांग की है। वहीं सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि अभी ऐसी कोई औपचारिक मांग सामने नहीं आई है। अगर आती है तो जरूरी फैसला किया जाएगा।
पुलिस अब तक इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं है कि जिस महिला का बेरहमी से कत्ल किया गया, वह सिर्फ फोन पर बातचीत करने वाले अनजाने शख्स के साथ रात के समय अकेली कैसे चली गई।
एडीजी ने भी जताई संभावना
गार्ड रामसेवक जिस सिम कार्ड से बात करता था, वह सिम किसके नाम से है, उसे सामने क्यों नहीं लाया जा रहा है?
जांच की निगरानी कर रही एडीजी सुतापा सान्याल से रविवार को जब ये सवाल हुए तो उन्होंने इतना भर कहा कि जिसके नाम से सिमकार्ड है, उसे सामने लाया जाना उचित नहीं है।
ऐसे ही कई अन्य सवालों के जवाब में अधिकारियों का यह कहना है कि इस सवाल का औपचारिक जवाब देना उचित नहीं होगा। यानी पुलिस बहुत चीजें छिपा रही है।
मौका-ए-वारदात का मुआयना करने के बाद एडीजी सुतापा सान्याल ने माना था कि घटना में दो या इससे अधिक लोग शामिल रहे होंगे।
खुद के सवालों को किया अनदेखा
उन्होंने फोरेंसिक एक्सपर्ट की राय का भी हवाला दिया था। सवाल यह भी उठता है कि रामसेवक के बारे में तो पुलिस को तफ्तीश शुरू होते ही जानकारी हो गई थी।
यह जानकारी महिला के सिम कार्ड की कॉल डिटेल से हुई थी। इसी आधार पर एडीजी ने यह कहा था कि कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है जबकि कुछ अन्य की तलाश की जा रही है।
लेकिन जिस तरीके से खुलासा हुआ उससे सवाल उठते हैं कि तफ्तीश में पुलिस ने अपने ही कई सवालों को अनदेखा कर दिया।