यूजीसी के निर्देश के अनुसार जेआरएफ अभ्यर्थियों को दो साल के भीतर पीएचडी के लिए इनरोल होना होता है। ऐसा न होने पर उन्हें फेलोशिप नहीं मिल पाती। काफी अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्हें जेआरएफ की परीक्षा पास किए हुए दो साल होने को हैं। लविवि की प्रवेश परीक्षा न होने की वजह से उनकी फेलोशिप पर खतरा मंडरा रहा है। उनकी मांग है कि लविवि रिजल्ट घोषित कर दे, जिससे कि उनकी फेलोशिप शुरू हो सके।
70 अंक की प्रवेश परीक्षा के बाद 30 नंबर के लिए होना है साक्षात्कार
पीएचडी प्रवेश परीक्षा में लिखित परीक्षा 70 अंक की और मौखिक 30 अंक की होगी। यानी की प्रवेश परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को साक्षात्कार भी देना है। लिखित परीक्षा में दो भाग हैं। दोनों भाग 35-35 नंबर के हैं। दोनों में ही एक-एक नंबर के 35-35 सवाल पूछे गए हैं। परीक्षा में निगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई है। इसके साथ ही सभी संकायों ने प्रवेश परीक्षा के सिलेबस में रिपोर्ट और डॉक्यूमेंटेंशन को अनिवार्य किया है। पेपर लविवि के परास्नातक पाठ्यक्रम पर आधारित हैं।
यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी नंबर लाने वाले अभ्यर्थी ही दाखिले के पात्र होंगे। भले ही किसी विभाग में 50 फीसदी नंबर लाने की अनिवार्यता पूरी करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या निर्धारित सीट से कम हो जाए।
ऐसी सूरत में सीट खाली रहेंगी, लेकिन पीएचडी में 50 फीसदी से कम नंबर लाने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए नहीं बुलाया जाएगा।