लखनऊ। पीजीआई के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटीज विभाग ने बंगलूरू में हुए इंडियन एसोसिएशन ऑफ पीडियाट्रिक सर्जन्स के वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन (आईएपीएस कॉन-2026) में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विभाग को नेतृत्व, शोध और नवाचार के लिए सात राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन ने सभी विजेताओं को बधाई दी।
सम्मेलन में विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार को पीडियाट्रिक सर्जरी में उल्लेखनीय योगदान के लिए नेशनल लीडरशिप अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें सर्जिकल देखभाल, शिक्षण और शोध में नेतृत्व के लिए दिया गया। विभाग के प्रो. अंकुर मंडेलिया ने दो शोधपत्रों के लिए दो प्रथम पुरस्कार जीते। उनका पहला शोध बच्चों में पोर्टल वेन ब्लॉकेज के लिए होने वाली शंट सर्जरी के बाद किडनी पर पड़ने वाले असर पर था, जबकि दूसरा शोध बच्चों में इंट्राऑपरेटिव एंटेरोस्कोपी की उपयोगिता पर था।
डॉ. लेफ्टिनेंट कर्नल राहुल गोयल को सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र के लिए प्रतिष्ठित यूसी चक्रवर्ती गोल्ड मेडल मिला। उनका शोध ईएचपीवीओ में प्लीहा की इलास्टोग्राफी से वैरिक्स और पोर्टल प्रेशर का पता लगाने पर था। डॉ. शुचि वार्ष्णेय को 14 साल में देखे गए एक्स्ट्रागोनाडल जर्म सेल ट्यूमर पर शोध के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। डॉ. आनंद कुमार मौर्य को शिशुओं में रेक्टल डुप्लीकेशन के सर्जिकल प्रबंधन पर शोध के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। डॉ. पूजा प्रजापति ने दो द्वितीय पुरस्कार जीते। पहला शोध बिलियरी एट्रेसिया में बिना शल्यक्रिया यकृत फाइब्रोसिस पता लगाने के बायोमार्कर पर और दूसरा बच्चों में दुर्लभ पैंक्रियाटिक ट्यूमर के सर्जिकल परिणामों पर था।