पीजीआई में साइबर सिक्योरिटी पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते निदेशक प्रो. आरके धीमन
संजय गांधी पीजीआई के निदेशक प्रो.आरके धीमन के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं के ऑनलाइन होने की वजह से इनकी सुरक्षा भी बेहद अहम है। इस समय कुल साइबर हमलों में से 22 फीसदी अकेले स्वास्थ्य सेवाओं पर होते हैं। निदेशक बुधवार को संस्थान में डिजिटल लचीलापन और डेटा संरक्षण पर हुई कार्यशाला में बोल रहे थे।
निदेशक ने बताया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में रुपयों का ऑनलाइन आदान-प्रदान बढ़ा है। देश में वर्ष 2024 में लगभग 37 करोड़ मैलवेयर हमलों का अनुभव किया गया। औसतन हर मिनट 702 हमलों की पहचान विशेषज्ञों ने की। इनमें से 22 फीसदी स्वास्थ्य सेवाओं पर थे। इसके बाद आतिथ्य, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं, शिक्षा और सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्योग क्षेत्र रहे। भारतीय संगठनों को औसतन प्रति सप्ताह करीब 3,300 से अधिक हमलों का सामना करना पड़ा। इसका मतलब अस्पतालों के लिए भी साइबर सुरक्षा अहम है। दूरसंचार के महानिदेशक आशुतोष पांडेय ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड, टेलीमेडिसिन और एआई-संचालित डायग्नोस्टिक्स सभी तकनीक पर निर्भर होते जा रहे हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा अहम है। यह कार्यशाला पीजीआई में अस्पताल प्रशासन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आर हर्षवर्धन की पहल पर आयोजित हुई। इस मौके पर चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष सचिव कृतिका शर्मा, सहायक पुलिस अधीक्षकऋषभ रनवाल और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रल्लापल्ली वसंत कुमार मौजूद रहे।