वर्ष 2012 में असम दंगों के बाद दक्षिण भारत के राज्यों में एसएमएस से एक हेट कैंपेन चलाया गया था जिसमें पीएफआई के साथ हरकत उल जिहाद अल इस्लामी (हूजी) के साथ ही मनिथा नीति पसराई और कर्नाटक फोरम फॉर डिगनिटी का नाम आया था। कुछ एसएमएस पाकिस्तान से भी भेजे गए थे। इस कैंपेन से पुणे, चेन्नई, हैदराबाद और दिल्ली से पूर्वोत्तर राज्यों के करीब 30,000 लोग वापस अपने राज्यों में चले गए थे।
अप्रैल 2013 में केरल पुलिस ने कन्नूर के नारथ में योगा कैंप के नाम पर चल रहे एक ट्रेनिंग कैंप में छापा मारकर पीएफआई के 21 लोगों को गिरफ्तार किया था। कैंप से दो बम, एक तलवार और बम बनाने की सामग्री मिली थी।
इससे पूर्व जून 2011 में मैसूर के महाजन कॉलेज परिसर में दो लड़कों की पांच करोड़ रुपये फिरौती के लिए अपहरण के बाद हत्या में भी पीएफआई में शामिल कर्नाटक फोरम फॉर डिगनिटी संगठन के सदस्यों का नाम आया था। ये हत्याएं संगठन का कोष बढ़ाने के इरादे से की गई थीं। जनवरी 2011 में केरल पुलिस ने एक निजी क्रिश्चियन कॉलेज के प्रोफेसर टीजे जोजफ पर जानलेवा हमले में पीएफआई के 27 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
प्रोफेसर टीजे जोजफ ने परीक्षा के प्रश्नपत्र में पैगंबर साहब पर विवादित सवाल बनाया था जिसके चलते उन पर हमला किया गया था। केरल पुलिस ने हमलावरों की तलाश में दबिश देना शुरू किया तो पीएफआई के जिला सचिव ने अधिकारियों को गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी थी।
छापे के दौरान पीएफआई के ठिकानों से अल कायदा के तमाम वीडियो मिले थे। वर्ष 2011 में मुंबई ब्लास्ट, वर्ष 2012 में पुणे में हुए धमाके और वर्ष 2013 में हैदराबाद में हुए विस्फोटों में भी भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पीएफआई की भूमिका पाई गई थी।
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लखनऊ में हुए प्रदर्शन में सोमवार को 13 और आरोपी गिरफ्तार किए गए। इसके अलावा विभिन्न थानों में सात मुकदमे और दर्ज किए गए हैं। एसएसपी ने बताया कि सोमवार को मुकदमों की संख्या 34 से बढ़कर 41 हो गई।
एसएसपी ने बताया कि उपद्रवियों के खिलाफ सबसे ज्यादा मुकदमे व गिरफ्तारी की कार्रवाई हजरतगंज कोतवाली की पुलिस ने की है। अब तक हजरतगंज में 18 मुकदमे दर्ज किए गए हैं जिनमें से सिर्फ एक पुलिस की तरफ से है। पुलिस 60 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
इसके अलावा हसनगंज व ठाकुरगंज में पांच-पांच, चौक में तीन, कैसरबाग, अमीनाबाद, गुडंबा में दो-दो और वजीरगंज, अलीगंज, गाजीपुर व चिनहट में एक-एक एफआईआर दर्ज की गई हैं। सभी मुकदमों में लगभग 300 लोगों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया है। सीसीटीवी कैमरों और वीडियो फुटेज व फोटो से पुलिस ने 60 से ज्यादा उपद्रवियों को चिह्नित किया था। मुकदमे और गिरफ्तारी की कार्रवाई फिलहाल जारी रहेगी।
इंस्पेक्टर हजरतगंज धीरेंद्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि बृहस्पतिवार को हिंसा के दौरान वसीम अहमद, नदीम और अशफाक की लोकेशन हजरतगंज इलाके में ही थी। तीनों रिहाई मंच व अन्य संगठन के पदाधिकारियों के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे जबकि उनके भड़कावे पर कैसरबाग, नाका, अमीनाबाद के युवक बेगम हजरतमहल पार्क की तरफ एकत्र होकर पत्थरबाजी व आगजनी कर रहे थे।