पीएफ घोटाले में यूपीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन व ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय अग्रवाल को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) क्लीन चिट दे सकती है। जिस हस्ताक्षर के आधार पर इस घोटाले में संजय के शामिल होने का शक था उसके फर्जी होने की बात सामने आई है।
गलत तरीके से कर्मचारियों के पीएफ के पैसों का प्राइवेट फर्मों में हुए निवेश से संबंधित एक पत्रावली पर संजय के हस्ताक्षर का आरोप लगा था। पत्रावली जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था। सूत्रो के अनुसार प्रयोगशाला ने जांच के बाद उस हस्ताक्षर को फर्जी बताया है।
दिल्ली में हुई पूछताछ में संजय अग्रवाल ने भी इसे फर्जी बताते हुए पीएफ घोटाले से खुद को अनभिज्ञ बताया था। ईओडब्ल्यू के सूत्रों का कहना है कि उस हस्ताक्षर के अलावा और कोई भूमिका संजय की इस घोटाले में प्रतीत नहीं हो रही है। हालांकि इस बारे में आधिकारिक रूप से कोई भी बोलने को तैयार नहीं है।
बता दें कि दिसंबर में इस घोटाले के सामने आने के बाद हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी और इसकी विवेचना ईओडब्ल्यू से शुरू कराई गई थी। मामले में यूपीपीसीएल के पूर्व वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी समेत कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।