यूपीपीसीएल के कर्मचारियों के पीएफ निवेश में हुए घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू को कालेधन की चेन तलाशना मुश्किल हो रहा है। खातों की डिटेल से पैसों के अनियमित लेन देन की जानकारी तो मिली है, लेकिन कालेधन को सफेद करने के लिए जो कैश ट्रांजक्शन हुआ, वह पैसा कहां गया? ईओडब्ल्यू इसकी चेन तलाशने की कोशिश कर रही है।
इस पूरे मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की भूमिका काफी संदिग्ध बताई जा रही है। उक्त सीए से अब तक तीन बार पूछताछ की जा चुकी है। उसे सोमवार को फिर से दस्तावेजों के साथ आने को कहा गया है।
सूत्रों का कहना है कि उक्त सीए द्वारा दी गई जानकारी को सत्यापित किया जा रहा है। जानकारी गलत पाई गई और पुख्ता साक्ष्य मिले तो उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
यह सीए दिल्ली की ही फर्म का है, जिसने डीएचएफएल में बड़ी रकम निवेश कराई थी। सीए के ही कहने पर निवेश के बदले मिली ब्रोकरेज की रकम को दूसरे खातों में भेज कर वहां से कैश पैसे लिए गए। कैश पैसों को रियल एस्टेट में लगाने की जानकारी भी मिली है।