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कबूतर व पालतू जानवर बन सकते हैं बीमारी की वजह, इस रोग का है खतरा

Sun, 20 May 2018 05:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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घर में कबूतर समेत दूसरे पालतू जानवरों की वजह से परिवार के सदस्यों को सांस के गंभीर रोग आईएलडी (इंटेरेसटीशियल लंग डिजीज) का खतरा रहता है। आईएलडी होने पर व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ के साथ जोड़ों में दर्द हो सकता है।

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यह जानकारी पीजीआई चंडीगढ़ से आए चेस्ट रोग विशेषज्ञ प्रो. डी बेहरा ने दी। वह शनिवार को एक स्थानीय होटल में आईएलडी पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

इस मौके पर मुख्य अतिथि डॉ. डी. बेहरा ने डॉ. सूर्यकांत की पुस्तक 'हैंडबुक ऑफ आईएलडी' का विमोचन किया। अध्यक्षता केजीएमयू वीसी प्रो. एमएलबी भटट् ने की। इस अवसर पर एरा विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. अब्बास अली और केजीएमयू के अन्य चिकित्सक मौजूद थे।
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डॉ. बेहरा ने बताया कि भारत में यह बीमारी 1972 में डायग्नोस हुई थी, लेकिन उसके बाद भी बेहतर जांच मशीनों के अभाव में मरीजों में रोग की पुष्टि ज्यादा नहीं होती थी। वर्तमान में आधुनिक मशीनें उपलब्ध होने के साथ ही लक्षणों की पुष्टि हो चुकी है।

ऐसे में रोग आसानी से पकड़ में आता है। इसकी पहचान और बीमारी की गंभीरता को बढ़ाने के लिए डॉक्टरों में जागरूकता बढ़ानी है। 

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67 प्रतिशत आईएलडी मरीजों को दी जा रही टीबी की दवा

जागरूकता की कमी से अब भी 67 प्रतिशत आईएलडी मरीजों को टीबी की दवा दी जा रही है। आईएलडी 140 बीमारियों का समूह है, इस बीमारी की पहचान आसानी से हो जाती है।

कुछ 20 प्रतिशत बीमारियों का इलाज भी संभव है। जो जानकारियां मिली हैं, उनमें कबूतर के पंख, जानवरों के बालों पर पाए जाने वाले रूसी ड्रग्स, फफूंद और वातावरण में पाए जाने वाले प्रदूषण प्रमुख कारण है। यह बीमारी भारत ही नहीं पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। भारत में बीते दो साल की ओपीडी में 800 मरीज पंजीकृत हुए हैं। 
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अमेरिका से आई थी यह बीमारी

एरा मेडिकल कॉलेज के पल्मोनरी मेडिसिनि के विभागाध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि आईएलडी अमेरिका से आई थी। यह बीमारी पहले एक लाख आबादी में 30 लोग को अपनी चपेट में लेती थी। अब आबादी बढ़ने से रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि यह रोग अन्य बीमारियों की दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में भी हो जाती है। इसलिए जीने चढ़ने पर सांस फूलने लगती है और सूखी खांसी आती है तो तुरंत विशेषज्ञ से परार्मश लें।

पहचानें लक्षण
  • सूखी खांसी आना,
  • नाखूनों में सूजन
  • जोड़ों में दर्द
  • सांस फूलना
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