लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कथित फर्जी मुठभेड़ में ऑटो चालक को फंसाने के आरोपों की जांच संबंधी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता सावित्री को कानून के अनुसार अन्य सक्षम मंच पर राहत लेने की स्वतंत्रता भी दी।
याचिका में आरोप था कि युवती के ऑटो से कूदने की घटना के बाद चालक ने उसे अस्पताल पहुंचाने में मदद की थी, लेकिन बाद में पुलिस ने उसी चालक को झूठे मुकदमे और फर्जी मुठभेड़ में फंसा दिया। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जगरानी अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और घटनास्थल से अस्पताल तक के फुटेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। जगरानी अस्पताल के निदेशक अमिताभ गौरव ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज केवल 15 दिन तक सुरक्षित रहता है, इसलिए 30 मई 2026 का फुटेज उपलब्ध नहीं है। साथ ही अस्पताल के रिकॉर्ड में संबंधित युवती के इलाज का कोई विवरण भी नहीं मिला।