लखनऊ। आम दिनों में जो स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस एक सप्ताह में मिल जाते थे, वे महीनेभर बाद भी नहीं मिल सके हैं। इस कारण 250 आवेदक परेशान हैं। डीएल संबंधी कामकाज देखने वाली कंपनी में बदलाव के बाद से मुश्किलें बढ़ी हैं। आवेदकों की शिकायतें परिवहन विभाग के मुख्यालय भी पहुंच रही हैं।
चौक की दरख्शा ने 21 नवंबर को डीएल से जुड़ी प्रक्रिया पूरा कर ली थी। उनके मोबाइल पर अप्रूव्ड डीएल नंबर यूपी32-20250038348 का मेसेज भी पहुंच गया। हालांकि, एक महीना होने को है, उनका डीएल घर तक नहीं पहुंचा है। ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ पहुंच रहे ऐसे तमाम आवेदकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए परिवहन विभाग मुख्यालय भेजा जा रहा है। दरख्शा ने बताया कि मुख्यालय से पता चला कि उनका डीएल डिस्पैच ही नहीं हुआ है।
डीएल के आवेदन की स्क्रूटनी से लेकर डिस्पैच तक का काम पहले स्मार्ट चिप कंपनी देख रही थी। अब यह जिम्मेदारी सिल्वर टच लिमिटेड को दी गई है, जो कामकाज को पूरी तरह संभाल नहीं पाई है। डीएल न मिलने की समस्या पूरे प्रदेश में बनी हुई है।
कर्मचारियों की लापरवाही से गड़बड़ी
मंजूरी के बाद डीएल को मुख्यालय भेजा जाता है। यहां से स्मार्ट कार्ड में डाटा क्लाउड पर अपलोड किया जाता है, जिसे की मैनेजमेंट सिस्टम (केएमएस) कहते हैं। शिकायतों की जांच के बाद कई कार्ड ऐसे पाए गए, जिनका केएमएस ही नहीं हुआ है। लखनऊ के ऐसे 250 डीएल हैं। इसमें कार्यदायी संस्था के कर्मचारियों की लापरवाही सामने आ रही है।
आधिकारिक वर्जन
कार्यदायी संस्था के सुपरवाइजरों को बुलाकर चेतावनी दी गई है। दोबारा ऐसी गलती होने पर कार्रवाई होगी। यह भी कहा गया है कि ऐसी व्यवस्था बनाएं, जिससे ऑनलाइन दिखे कि कर्मचारियों ने कितने कार्डों की प्रक्रिया पूरी की है।
- सुनीता वर्मा, अपर परिवहन आयुक्त (आईटी)