गर्मी बढ़ने के साथ ही प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतरती जा रही है। भीषण गर्मी में राजधानी समेत तकरीबन सभी बड़े शहरों, जिला मुख्यालयों पर अघोषित कटौती से लोग बेहाल हो गए हैं। गांवों, कस्बों व तहसील मुख्यालयों पर शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। केंद्र व राज्य की कई तापीय इकाइयों के बंद होने की वजह से संकट और बढ़ गया है। वितरण और ट्रांसमिशन नेटवर्क के ओवरलोड होने तथा अन्य तकनीकी कारणों से भी सभी क्षेत्रों में रोस्टर के आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
वाराणसी, प्रयागराज, बरेली, कानपुर, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, झांसी, ललितपुर, चंदौली, गाजीपुर, प्रतापगढ़, बलिया, सोनभद्र, मिर्जापुर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, देवरिया, गाजियाबाद, मुरादाबाद समेत तमाम जिलों के शहरी इलाकों में दो से चार घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आठ से 10 घंटे तक कटौती ने उपभोक्ताओं के पसीने छुड़ा दिए हैं।
लोकल फाल्ट व अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर बड़े पैमाने पर आपात कटौती की जा रही है। यह स्थिति पुराने लखनऊ से लेकर ट्रांसगोमती वाले क्षेत्रों और वीआईपी इलाकों की है। लखनऊ के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी खराब हैं। चिनहट, काकोरी, मोहनलालगंज, सरोजनीनगर आदि क्षेत्रों में कई-कई घंटे की कटौती से लोग परेशान हैं।
मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता कम
बिजली की मांग 21,000-22,000 मेगावाट
उपलब्धता 19,000 मेगावाट के आसपास
कमी : पीक आवर्स में 2500-3000 मेगावाट, सामान्य अवधि में 1500-2000 मेगावाट
(पावर कॉर्पोरेशन की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार ही गांवों को 18 घंटे के बजाय औसतन 13 घंटे, कस्बों व तहसीलों को 21:30 घंटे के बजाय 19 घंटे आपूर्ति हो पा रही है।)
दिक्कत इसलिए भी
एनर्जी एक्सचेंज और उत्तरी ग्रिड में बिजली की कीमत ज्यादा होने की वजह से भी दिक्कत आ रही है। आर्थिक तंगी के कारण पावर कॉर्पोरेशन अतिरिक्त बिजली नहीं खरीद पा रहा है।
केंद्र के कोटे से कम मिल रही बिजली, कई इकाइयां बंद होने से भी बढ़ा संकट
प्रदेश में बिजली संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। अभियंताओं के मुताबिक केंद्रीय सेक्टर के सिंगरौली, रिहंद, दादरी, औरैया बिजलीघरों की कई इकाइयों के तकनीकी कारणों से बंद होने की वजह से केंद्र से यूपी को मिलने वाली बिजली के कोटे में कमी हो गई है। इस समय केंद्र से 8,000-9,000 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है, जबकि कोटा 10,000 मेगावाट से ज्यादा का है।
इसी तरह प्रदेश के अनपरा, हरदुआगंज, ओबरा, बारा व ललितपुर बिजलीघर की कई इकाइयों के बंद होने से भी बिजली की उपलब्धता में कमी हुई है। प्रदेश के 19,298 मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों से बमुश्किल 10,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो पा रहा है।
कोयला संकट की भी आहट
बिजली की जबर्दस्त किल्लत के बीच ताप बिजलीघरों के लिए कोयले के संकट की आहट भी सुनाई देने लगी है। अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज व पारीछा बिजलीघर में रोजाना जितनी खपत है, कोल इंडिया से उससे कम कोयले की आपूर्ति हो रही है। कोयले की कमी के कारण कई इकाइयों को कम क्षमता पर चलाया जा रहा है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार अनपरा में छह दिन, ओबरा में चार दिन, हरदुआगंज में तीन दिन व पारीछा में एक दिन का ही कोयला बचा है। अधिकारियों का कहना है जल्द कोयले की पर्याप्त आपूर्ति शुरू न हुई तो आने वाले दिनों में समस्या और गहरा सकती है।
सभी क्षेत्रों को तय रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति का प्रयास किया जा रहा है। तकनीकी कारणों कहीं थोड़ी-बहुत आपूर्ति प्रभावित हो सकती है तो उसके लिए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मार्केट में भी बिजली उपलब्ध नहीं है, इसलिए खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है। जहां तक कोयले का सवाल है तो उसके लिए केंद्र से लगातार संपर्क रखा जा रहा है। सभी क्षेत्रों को तय शिड्यूल के अनुसार बिजली मिले। इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
- एम. देवराज, अध्यक्ष, उप्र पावर कॉर्पोरेशन