लॉकडाउन में राजधानी के लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है। मार्च की अपेक्षा अप्रैल में ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन या एचबीए1सी का स्तर 0.07 फीसदी बढ़ा है। यह 8.21 से 8.28 फीसदी हो गया है। इसकी मूल वजह तनाव बताया जाता है। यह खुलासा इंडिया डायबिटीज केयर इंडेक्स (आईडीसीआई) के सर्वे में हुआ है।
आईडीसीआई की ओर से शहर के 100 लोगों पर किए गए इस अध्ययन में शामिल मरीजों की औसत आयु 55 वर्ष थी। इनमें से 63 प्रतिशत पुरुष व 37 फीसदी महिलाएं थीं। इनका जनवरी से मार्च के बीच एचबीए1सी का स्तर 8.21 फीसदी था, जो अप्रैल में 8.28 प्रतिशत पहुंच गया। यह आंकड़ा उस समय आया है जब चिकित्सकीय शोधों में कहा जा रहा है कि डायबिटीज से पीड़ित लोगों को कोविड-19 का खतरा ज्यादा है।
क्या है एचबीए1सी टेस्ट
एचबीए1सी टेस्ट से पिछले तीन महीनों के औसत ब्लड ग्लूकोज स्तर का पता चलता है और लंबे समय में ब्लड ग्लूकोज नियंत्रण करने का सबसे अच्छा इंडीकेटर माना जाता है। ऐसे में मरीजों का पहले से लिया और अप्रैल के आंकड़े का मिलान किया गया।
बढ़ जाएगी समस्या
एचबीए1सी का स्तर बढ़ने से ऐसे बुजुर्ग जो पहले से हाइपरटेंशन, हार्ट डिजीज, पल्मोनरी डिसऑर्डर और मोटापे से जूझ रहे हैं, उनकी समस्या बढ़ जाएगी। इन पर कोविड-19 की वजह से और गंभीर परिणाम भुगतने का खतरा है।
अभी खास ध्यान रखने की जरूरत
इंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. शरद कुमार का कहना है कि लॉकडाउन में डायबिटीज के मरीजों को खुद का ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। कोरोना से होने वाली मौत में डायबिटीज को बढ़ा कारण माना गया है। ऐसे में डायबिटीज के मरीज नियमित तौर पर दवाएं लेते रहें। शारीरिक अभ्यास को बनाए रखें।
इन लक्षण पर रखें ध्यान
डॉ. अनिल शिंदे ने बताया कि डायबिटीज मरीजों को ब्लड ग्लूकोज की जांच करते रहना चाहिए। कार्बोहाइड्रेट जैसे शहद, जैम और कैंडीज का भी पर्याप्त स्टॉक रखना चाहिये। उन्हें ग्लाइसेमिक (ब्लड ग्लूकोज) को लेकर सावधान रहना चाहिए। सांस लेने में परेशानी या सांस ना आना, सीने में लगातार दर्द या दबाव महसूस होना, भ्रम या घबराहट महसूस होना, होंठ या चेहरे का नीला पड़ जाना जैसी स्थिति हो तो डॉक्टर से जांच कराएं।
आशा से प्राप्त करें दवाएं
यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं और दवाएं खत्म हो गई हैं तो तत्काल अपने इलाके की आशा कार्यकत्री से संपर्क करें। वह दवाएं मंगवाने की व्यवस्था कराएंगी। इसके बाद भी दवाएं नहीं मिल रही हैं तो सीएमओ कार्यालय या जिला प्रशासन से शिकायत कर सकते हैं।