सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान का साथ देने पर चीन के खिलाफ शहरियों ने भी आवाज बुलंद कर दी है। इसका सीधा असर चाइना आइटम की मंडी पर दिखने लगा है।
भले ही दूसरे शहर में चाइनीज मोबाइल की बिक्री में इजाफा हो रहा, लेकिन लखनऊ में मोबाइल कारोबार को करारा झटका लगा है। यहां चाइनीज मोबाइल की बिक्री आधी रह गई।
ग्राहक चाइनीज मोबाइल की जगह पर दूसरी कंपनियों के मोबाइल को तरजीह दे रहे। दीपावली के ऐन मौके पर इस झटके से मोबाइल स्टाकिस्टों के पसीने छूटने शुरू हो चुके।
इतना ही नहीं स्टाकिस्ट का कहना है कि दीपावली के लिए जिन लोगों ने चाइनीज मोबाइल की बुकिंग कराई थी, वो भी अब रद्द होती जा रही है। गौरतलब है कि शहर में चाइनीज मोबाइल का सालाना कारोबार करीब 250 करोड़ का है, जिसमें सबसे ज्यादा मोबाइल की बिक्री दीपावली सीजन में ही होती है।
उधर, इलेक्ट्रॉनिक्स की प्रमुख मार्केट नाका हिंडोला के कारोबारी मन्नू तेजवानी के मुताबिक चाइनीज मोबाइल की जगह पर कार्बन, सैमसंग, लावा, माइक्रोमैक्स जैसी कंपनियों के मोबाइल धड़ल्ले से बिक रहे।
लखनऊ में सालाना 20 करोड़ के चाइनीज एवं 40 करोड़ के ब्रांडेड कंपनियों के मोबाइल बिकते थे, लेकिन नाका से पूर्वांचल के गोरखपुर और वाराणसी तक चाइनीज मोबाइल एवं एसेसरीज की सप्लाई होती है, जिससे सालाना कारोबार 250 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से चाइनीज आइटम के खिलाफ जो मुहिम शुरू हुई उससे साल भर होने वाला मोबाइल कारोबार प्रभावित होना शुरू हो चुका है।
नाका के चाइना मोबाइल कारोबारी धर्मेंद्र बंसल कहते कि अब तो 550 रुपये कीमत का चाइनीज मोबाइल का बिकना बंद हो चुका। इसकी जगह कंपनियों के 800 से 1000 रुपये कीमत के मोबाइल बिक रहे। इससे दिल्ली से चाइनीज मोबाइल की खेप भेजने वाले बड़े कारोबारियों में खलबली मच चुकी है।