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बाहर आते ही शेर के बच्चों ने मचाई धमाचौकड़ी, दर्शक उमड़े

Mon, 26 Oct 2015 02:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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करीब डेढ़ महीने का इंतजार...। शहर बब्बर शेर के शावकों का देखने को लालायित था। रविवार को यह हसरत पूरी हुई। पहली बार शेरनी वसुंधरा अपने चारों शावकों के साथ बाड़े में आई। कोई मां की पूंछ को दबाए हुए, तो कोई पीछे-पीछे...। कदम लड़खड़ाए तो वसुंधरा ने हौले से थपकी दे उन्हें संभाला। बाड़े में पहुंचना था कि शुरू हो गई धमाचौकड़ी। शावकों की अठखेलियों पर फिदा लोगों ने उनका तालियों से वेलकम किया।
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लखनऊ चिड़ियाघर में वसुंधरा ने 55 दिन पहले चार शावकों को जन्म दिया। शनिवार तक वसुंधरा अपनी मांद में ही रह रही थी। सीसीटीवी कैमरों के जरिये उनकी हर हरकत पर नजर रखा जा रहा था।

रविवार सुबह 10 बजने से दो-चार मिनट पहले ही मांद का दरवाजा खोला गया। पहले दो शावकों संग वसुंधरा बाड़े में आई। पीछे-पीछे दो और शावक आ गए। दर्शकों समेत मौजूद स्टाफ ने तालियों से पांचों का स्वागत किया। सुबह से ही बाड़े के इर्द-गिर्द बड़ी संख्या में दर्शक इकट्ठा थे।
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शावकों की अठखेलियों की साफ झलक पाने के लिए एक कोने से दूसरे कोने तक भागदौड़ करते रहे। बाड़े के भीतर के दृश्यों को कैमरे में कैद करने में जुटे रहे। सीनियर चिकित्सक डॉ. अशोक कश्यप ने बताया कि उनकी हरकतों पर नजर रखने के लिए अंदर तीन और बाहर तीन सीसीटीवी लगाए गए हैं।

मां ने रगड़े पंजे तो शावकों ने की घास-मिट्टी में कलाबाजी

बाहर आते ही वसुंधरा ने छलांग लगाकर पेड़ के तने पर अपने पंजे धंसा दिए। पहली बार खुले आसमान, खिली धूप में शावक निकले तो घास-मिट्टी का मैदान पाते ही कलाबाजियां लगाने लगे। आपस में लड़ते-झगड़ते रहे।  घास, पौधे और लकड़ी के बड़े ठूंठ को चबाते उनसे उलझते रहे।

शावकों को अंदर ले जाने के लिए मां ने दिखाए कड़क तेवर
दोपहर तक दौड़भाग करने केबाद शावकों की धमाचौकड़ी रुकी तो दो शावक गुफानुमा एंट्री गेट के बाहर तो दो शावक मां के संग भीतर ही सो गए। देर शाम उन्हें भीतर ले जाने के लिए मां को कड़क तेवर दिखाने पड़े।

4 किलो के शावक रोज खा रहे 250 ग्राम मुर्गा
उपनिदेशक जू डॉ. उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि 55 दिनों से अधिक के हो चुके शावकों का वजन चार किलो से अधिक है। दिनभर मां का दूध पीने के अलावा वे हर रोज करीब 250 से 300 ग्राम तक मुर्गे का गोश्त खा रहे हैं।

पिता पृथ्वी एक साल तक नहीं देख सकेगा शावकों को

शावकों और वसुंधरा से बिल्कुल अलग नजदीक के बब्बर शेर के बाड़े में रह रहा पिता पृथ्वी अभी साल भर तक शावकों को नहीं देख सकेगा। शावकों की पैदाइश के बाद से हीअलग रखा गया पृथ्वी आहट होते ही दहाड़ने लगता है।

बाड़े से बाहर आता है लेकिन शावकों को देख नहीं पाता। शावकों की पैदाइश के बाद से ही उसका बाड़ा बदल दिया गया। निदेशक जू अनुपम गुप्ता ने बताया कि अब जब तक बच्चे कम से कम एक साल के नहीं हो जाते, शावकों को मां केसाथ ही रखा जाएगा।

इन्होंने की खूब देखभाल
बाघ, बब्बर शेरों के कुनबों की देखभाल करने वाले लॉयन स्पेशलिस्ट कीपर मुबारक और वसुंधरा के पर्सनल कीपर मतीन ही पिछले 55 दिनों से शावकों की देखभाल में लगे थे। मांद के भीतर अंधेरा होने के चलते जोड़ी मोबाइल फोन से उनकी देखभाल करती थी। कंट्रोल रूम से सीसीटीवी पर लाइव फुटेज देख रहे मुबारक फोन पर मतीन को हिंट देते तो वहां मांद के भीतर की दिनचर्या पूरी होती।
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बाहर निकलते ही ट्रेनिंग शुरू

मांद से बाहर आते ही शावकों की टेरेटरी ट्रेनिंग शुरू हुई। बच्चे जहां दस कदम से ज्यादा दूर जाते, वसुंधरा उन्हें मुंह में पकड़कर वापस ले आती। एक घंटे के भीतर हर शावक के साथ उसने ऐसा किया।

डॉ. विकास ने बताया कि ये मां की ट्रेनिंग का एक हिस्सा होता है कि शावकों को उसकी मौजूदगी में कितनी दूर तक जाना है, उससे आगे जाने पर उसे टांग लिया जाएगा।

उप्र में लखनऊ जू का पहला रिकॉर्ड
पहली बार प्रदेश के किसी प्राणि उद्यान में एक साथ चार शावकों का जन्म हुआ और वे चारों स्वस्थ हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि कानपुर और लखनऊ प्राणि उद्यान में इससे पहले ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया।

इससे पहले वसुंधरा शेरनी ने कानन पेंडारी जू में ही इतने ही शावकों को जन्म दिया था। उनमें से कुछ आज देश के अन्य प्राणि उद्यानों में कुनबा बढ़ा रहे हैं।
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