हाईकोर्ट न्यू परिसर के सामने साझी विरासत व साझी शहादत के संयुक्त अभियान के तहत 1857 के संग्राम की जीत की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाकर देशभक्ति गीतों पर जमकर झूमे। वहीं, 1857 में बिरजिस कद्र की ताजपोशी का इतिहास समेटे पर्चे भी राहगीरों को बांटे गए। इन्हें पढ़कर लोग रोमांचित हो गए।
आयोजकों ने बताया कि आज सोशल मीडिया पर लोग एक दूसरे के खानपान से लेकर रंगों व नामों से परहेज कर रहे हैं। इसे देखकर यकीन नहीं होता कि हमारा मुल्क आज के दौर से अधिक समझदार था।
1857 के संग्राम में मुसलमानों, किसानों, मजदूरों, औरतों व बच्चों ने भाईचारे के दम पर दुनिया में कहीं न हारने वाली हेनरी लॉरेंस की फौज को लखनऊ में ध्वस्त कर दिया था। आयोजकों ने इस दौरान जनता से भाईचारा व सौहार्द बनाए रखने की अपील की। इस अवसर पर लोगों के बीच शरबत व बूंदी का वितरण भी हुआ।
कार्यक्रम में प्रो. रूपरेखा वर्मा, प्रो. रमेश दीक्षित, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष लाल बहादुर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता दीपक कबीर, व्यंग्यकार राजीव ध्यानी, नाईश हसन, मेहरू जाफर, अतहर हुसैन आदि मौजूद रहे।