लखनऊ। काकोरी क्षेत्र के रहमानखेड़ा में वन विभाग की टीम 58 दिनों से खाक छान रही है, लेकिन बाघ 18 शिकार करने के बाद भी पकड़ से दूर है। हैरानी इस बात की भी है कि बाघ लोगों को तो दिख रहा है, लेकिन वन विभाग की टीम को नहीं। बाघ कब पकड़ा जाएगा यह स्थिति साफ नहीं है। शुक्रवार को दो लोगों को बाघ दिखा और सूचना के बाद भी टीम मौके पर नहीं पहुंची। इससे बाघ जंगल की ओर भाग गया।
संस्थान के कर्मचारी ने देखा बाघ
शुक्रवार सुबह 9 बजे मोटी नीम से केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान जा रहे संविदाकर्मी मनोज ने उलरापुर मोड़ के पास पहुंचे तभी उन्हें बाघ दिखाई दिया। घबराए मनोज ने इसकी सूचना वन विभाग के अफसरों को दी, लेकिन तब तक बाघ दूर जा चुका था।
राहगीर ने देखा बाघ
दोपहर में 11:30 बजे मीठेनगर खंडजा स्थित रेलवे फाटक के पास राहगीर ने बाघ देखा। वह घबराकर भागा और कटीली झाड़ियों में गिरकर काटे लगने से वह घायल हो गया। वनकर्मियों को बाघ को रेलवे पटरी क्रास करने की जानकारी दी, पर वन कर्मी उल्टे ही राहगीर को फटकार लगा दी। इसके बाद कमांड सेंटर चले गए।
एक किमी. दायरे में की गई कॉम्बिंग
डीएफओ सितांशु पांडे ने बताया कि बाघ की सक्रियता मिलने की जानकारी पर वन विभाग की टीम ने जोन एक बेल वाले ब्लॉक में करीब एक किमी. तक कॉम्बिंग की। थर्मल ड्रोन से भी चहलकदमी समझी गई है। यहां बागों में बाघ के पगचिह्न मिले हैं। वहीं, पांच सीसीटीवी लाइव 32 फोटो ट्रैप कैमरे भी अलग अलग लोकेशन पर लगाए गए हैं। बाघ के नए पगचिह्न भी केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के पास पाए गए हैं।