बैठक में जांच शुल्क की दर तय होगी
उधर, सरकारी अस्पतालों में ग्रुप सी श्रेणी के मरीजों की ही स्वाइन फ्लू की जांच करने के लिए नमूने लेने के आदेश दिए गए हैं। इस कारण भी अब तक कम मरीज मिले हैं। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि निजी केंद्र संचालकों के साथ मंगलवार की बैठक में जांच शुल्क की दर तय होगी।
जिले में 250 से अधिक निजी पैथोलॉजी हैं। इनमें से बड़ी लैबों में ही स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा है। ये निजी केंद्र जांच के बदले 5500 से लेकर छह हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। इस कारण ज्यादातर लोग बिना जांच कराए ही लौट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कोरोना काल में आरटीपीसीआर जांच का शुल्क 700-900 रुपये तय किया गया था, लेकिन स्वाइन फ्लू के लिए अब तक कोई गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। एक ही जांच के लिए निजी सेंटर अलग-अलग कीमत वसूल रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों में आसान नहीं जांच कराना
स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के लिए सरकारी अस्पतालों में जांच करवाना आसान नहीं है। इसका कारण है कि यहां सी श्रेणी के मरीजों का ही नमूना लेने का आदेश हैं। इस श्रेणी में वे मरीज आते हैं, जिनमें सांस फूलने, ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसे लक्षण नजर आएं। इसके अलावा ये मरीज भर्ती हों। इस कारण संदिग्ध मरीज जांच के लिए निजी केंद्र पहुंच रहे हैं। यहां उनसे भारी शुल्क वसूला जा रहा है।
इस कारण भी कम है मरीजों का आंकड़ा
शहर में अभी बड़े निजी केंद्र ही स्वाइन फ्लू की जांच कर रहे हैं। इनके जरिये पॉजिटिव आने वाले केसों की रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय भेजी जा रही है। कई पैथोलॉजी सीएमओ की गाइडलाइन के इंतजार में अभी जांच नहीं कर रहे हैं। इस कारण भी स्वाइन फ्लू के मामले कम हैं।
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि निजी जांच केंद्र संचालकों के साथ आज होने वाली बैठक में स्वाइन फ्लू की जांच का शुल्क तय किया जाएगा। इसके बाद इससे अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभी केजीएमयू, लोहिया व एसजीपीजीआई संस्थान में स्वाइन फ्लू की जांच हो रही है। सरकारी अस्पतालों से नमूने यहां जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।