इंजेक्शन से नशा लेने वाले 48 लोगों में एचआईवी संक्रमण मिला है। इस नशे की लत से छुटकारा दिलाने वाले विशेष ओपिअड सब्सिट्यूशन थेरेपी (ओएसटी) सेंटर में आने वाले लोगों की जांच में इसका पता चला है। अब इन लोगों को एंट्री रिट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर से पंजीकृत करके इलाज मुहैया कराया जाएगा।
बता दें, यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी में इंजेक्शन से ड्रग का नशा करने 17 हजार से अधिक लोग (आईडीयू) पंजीकृत हैं। एचआईवी संक्रमण फैलाने वालों के हाईरिस्क ग्रुप में शामिल इन लोगों पर पीयर एजुकेटर और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से नजर रखी जाती है।
स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी एनजीओ की मदद से ऐसे लोगों को चिह्नित करके प्रदेश में बने 16 ओएसटी सेंटर में भर्ती करती है और इंजेक्शन से नशा लेने की लत से छुटकारा दिलाने का काम करती है। ऐसे ही सेंटर पर की गई जांच में ये नए एचआईवी संक्रमित लोग मिले हैं। वर्तमान में इन सेंटरों पर लगभग 1,800 आईडीयू नशा छोड़ने की सेवाएं ले रहे हैं। इन सेंटरों का संचालन नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (नाको) की मदद किया जा रहा है।
बता दें, प्रदेश में पहले महज 11 ओएसटी थे। इस वित्तीय वर्ष में पांच नए सेंटर और मिले हैं। प्रयागराज ऐसा जिला है, जहां दो सेंटर हैं। अन्य 14 जिलों में एक-एक सेंटर बनाया गया है। इन सेंटरों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत नशा छुड़ाने के लिए मुंह से लेने वाली दवाएं दी जाती हैं। जिससे लोग इंजेक्शन से नशा लेना छोड़ दें। साथ ही, उनके नशे से मुक्त होने पर पुनर्वास में भी मदद की जाती है ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।
इन 14 जिलों में हैं ओएसटी
लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, बस्ती, गोरखपुर, जालौन, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, मेरठ, आगरा, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, एटा और गाजियाबाद।
नशा छोड़ चुके लोगों की ले रहे मदद
इंजेक्शन से नशा लेने वालों की पहचान के लिए उन्हीं के बीच के ऐसे लोगों की मदद ली जाती है, जो नशा छोड़ चुके हैं। उन्हें बतौर पीयर एजुकेटर इस अभियान से जोड़ा जाता है। ये लोग नशा करने वालों को ओएसटी तक लाते हैं। ओएसटी आने वाले सभी लोगों की साल भर में दो बार एचआईवी और चार बार मेडिकल परीक्षण होता है। इसी जांच के दौरान नए 48 एचआईवी संक्रमित लोगों का पता चला है।
-रमेश चंद्र श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक टारगेटेट इंटरवेंशन