रायबरेली में बुधवार को जिला अस्पताल का पीआईसीयू वार्ड।
रायबरेली। जिला अस्पताल में स्थापित पीडियाट्रिक आईसीयू को दो चिकित्सक मिल गए हैं, लेकिन अन्य स्टाफ की अब भी कमी है। हालांकि, चिकित्सक मिलने के बाद मरीजों में उम्मीद जागी है। पीआईसीयू में बच्चों को भर्ती करने की सुविधा ठप होने के कारण जेई व एईएस से ग्रसित बच्चों के अभिभावकों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। दो चिकित्सकों के मिलने के बाद पीआईसीयू को संचालित किए जाने की तैयारी की जा रही है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2022 से संचालित पीडियाट्रिक आईसीयू में इन दिनों गंभीर रूप से बीमार बच्चों की भर्ती नहीं हो पा रही है। चिकित्सक और स्टाफ न होने के बाद लगे वेंटिलेटर धूल खा रहे हैं। यह मामला दिशा की बैठक में सदन के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के सामने उठने के बाद से गरमाया हुआ है। पीडियाट्रिक आईसीयू में मात्र डॉ. प्रशांत तैनात हैं। इसके अलावा कोई स्टाफ नहीं है, जबकि इसके लिए 18 लोगों के स्टाफ की जरूरत है। अब तक भर्ती प्रक्रिया नहीं कराई गई।
शासन की मंशा पर हुई भर्ती प्रक्रिया में जेई व एईएस के लिए दो चिकित्सक मिले हैं। इसमें डॉ. राजवीर सिंह व अजय कुमार को चयनित किया गया है। पीआईसीयू को दो चिकित्सक मिलने के बाद अब बच्चों को भर्ती करने की उम्मीद जगी है। 24 घंटे चिकित्सक उपलब्ध होने की दशा में पीआईसीयू में बच्चों को भर्ती करके वेंटिलेटर की सुविधा दी जा सकती है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण बेहतर चिकित्सीय सुविधाएं मिलने की उम्मीद कम है।
उधर, सीएमओ ने वेंटिलेटर चलाने के लिए दो चिकित्सकों को प्रशिक्षण के लिए लखनऊ भेजा है। ये चिकित्सक प्रशिक्षण लेकर फरवरी 2025 में वापस आएंगे।
पीडियाट्रिक आईसीयू के लिए दो चिकित्सक मिले हैं। एक चिकित्सक पहले से है। रोस्टर के हिसाब से चिकित्सकों की ड्यूटी लगाकर जल्द ही बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था कराई जा रही है। अन्य स्टाफ की व्यवस्था के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
डॉ. प्रदीप अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल