लखनऊ। नगर निगम ने निर्माण और विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भुगतान प्रक्रिया में बदलाव किया है। सोमवार को जारी आदेश के अनुसार अब किसी भी कार्य का भुगतान स्थलीय निरीक्षण और जीपीएस फोटो के बिना नहीं होगा। पांच लाख रुपये तक और इससे अधिक लागत वाले कार्यों के लिए अलग-अलग निरीक्षण व्यवस्था तय की गई है।
पांच लाख रुपये तक के कार्यों का संयुक्त निरीक्षण अवर अभियंता और सहायक अभियंता करेंगे। निरीक्षण के बाद जीपीएस फोटो पत्रावली में लगाना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पांच लाख रुपये से अधिक के कार्यों में अवर अभियंता, सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता संयुक्त रूप से निरीक्षण करेंगे। इन मामलों में भी जीपीएस फोटो के बिना फाइल आगे नहीं बढ़ेगी।
अधिशासी अभियंता पांच लाख रुपये तक के कार्यों का समय-समय पर औचक निरीक्षण भी करेंगे। कार्य शुरू होने से पहले अतिरिक्त काम जोड़ने के लिए नगर आयुक्त या अपर नगर आयुक्त से प्रशासनिक अनुमति लेना जरूरी होगा। बजट लिपिक जीपीएस फोटो लगी पत्रावली मिलने के बाद ही बजट शीट पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
मुख्य अभियंता महेश वर्मा ने सभी जोन के अभियंताओं और बजट लिपिकों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पहले 11 फरवरी 2025 के आदेशों में तीन स्तरों पर निरीक्षण की व्यवस्था थी। उस समय चार लाख रुपये और 7.50 लाख रुपये की सीमाएं निर्धारित थीं। व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए अब इसे सरल किया गया है।