काम की गुणवत्ता पर लगातार उठ रहे सवालों के बाद स्मार्ट सीवर लाइन के काम का भुगतान सीधे जल निगम को करने पर शासन ने रोक लगा दी है। अब पहले काम की जांच होगी उसके बाद ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा। अब स्मार्ट सिटी कंपनी की एसपीवी जांच के बाद भुगतान को लेकर संस्तुति करेगी।
स्मार्ट सिटी योजना के तहत एरिया बेस्ड डवलपमेंट केलिए चुने गए कैसरबाग, लालबाग, गोलागंज, वजीरगंज और अमीनाबाद क्षेत्र में स्मार्ट सीवर लाइन बिछाने का काम हो रहा है। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के काम की गुणवत्ता को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। बीते माह हुई नगर निगम सदन की बैठक में भी मानक के विपरीत हो रहे कामों को लेकर सवाल उठे थे, जिसको लेकर भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान ने जांच की मांग भी की थी। उनका आरोप था कि स्मार्ट सीवर के नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। मैनहोल घटिया तरीके से बनाए जा रहे हैं। ऐसे में कमेटी बनाकर काम की जांच कराई जाए और जल निगम के खिलाफ कार्रवाई हो। स्मार्ट सिटी योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने का काम जल निगम को दिया गया है, जिसे जल निगम ठेकेदार के जरिए करा रहा है।
कम क्षमता की डाली जा रही पाइप लाइन
भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान, सपा पार्षद यावर हुसैन रेशू और कांग्रेस पार्षद गिरीश मिश्र का कहना है कि जिस क्षमता की सीवर पाइपलाइन बिछाई जा रही है, वह कुछ ही सालों में फेल हो जाएगी। ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी उसका पूरा फायदा शहरवासियों को नहीं मिल पाएगा। पार्षद नागेंद्र सिंह कहते हैं कि जल निगम नौ इंच की सीवर पाइप डाल रहा है जबकि कम से कम 30 इंच का पाइप डालनी चाहिए। इसे लेकर प्रधानमंत्री तक से शिकायत की जा चुकी है।
काम तेज करने और गुणवत्तापूर्ण काम को लेकर भुगतान की प्रक्रिया में शासन ने बदलाव किया है। इसके तहत अब सीधे जल निगम को भुगतान के बजाय काम की जांच कर ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा। स्मार्ट सिटी की एसपीवी काम की गुणवत्ता देखेगी और उसके आधार पर भुगतान करेगी। शासन के आदेश के आधार पर जल निगम के प्रबंध निदेशक को पत्र भी भेजा गया है।
- एससी सिंह, महाप्रबंधक स्मार्ट सिटी