सिविल अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों से अब फीडबैक लिया जाएगा। पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी व वार्ड में भर्ती की व्यवस्थाओं पर उनकी प्रतिक्रिया ली जाएगी। फीडबैक के आधार पर अस्पताल अपनी खामियों को दूर करेगा। इससे अस्पताल में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ ही अस्पताल को आर्थिक मदद भी मिलेगी।
एनएचएम प्रोग्राम नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्स के तहत प्रोग्राम चल रहा है। कोई भी अस्पताल सभी मानकों को पूरा करता है तो उसे एक्सीलेंस के सर्टिफिकेट के साथ वित्तीय ग्रांट भी मिलेंगी। सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष चंद्र सुंद्रियाल ने बताया कि सेवा प्रावधान, मरीजों के अधिकार, इनपुट, सहायता सेवाएं, दैनिक देखभाल, संक्रमण नियंत्रण, गुणवत्ता के क्षेत्र को लेकर मानक तय होता है। अगले हफ्ते से इसे पूरी तरह से शुरू किया जाएगा।
इसके लिए विभागाध्यक्षों के साथ मीटिंग करके फीडबैक फॉर्म के सवालों के लिए प्लान बनाया जा रहा है। जल्द ही इसे भी तैयार कर फ ीडबैक लेना शुरू कराया जाएगा। बताया कि पहला चरण इंटरनल होता है, इसमें 70 फ ीसद से अधिक सफ लता मिलती है तो स्टेट की टीम आती है। टीम के जरिए भी 70 फ ीसद से अधिक नंबर मिलते हैं तो नेशनल टीम तीन दिनों तक पूरे अस्पताल का निरीक्षण करती है। उसके बाद ही सर्टिफि केट मिलता है। इससे अस्पताल को केंद्र सरकार से प्रति बेड दस हजार रुपये मिलते हैं।
पूछे जाएंगे ये सवाल :
ओपीडी फ ॉर्म के तहत पर्चा काउंटर पर कितना समय लगा, स्टॉफ का व्यवहार, डॉक्टर का व्यवहार, इलाज मिलने में लगा समय, ओपीडी कमरे का माहौल, साथ के अन्य स्टॉफ के व्यवहार के बारे में पूछा जाएगा। वहीं भर्ती मरीजों से वार्ड में साफ-सफाई, डॉक्टर के देखने का समय, दवा समय पर मिल रही या नहीं समेत अन्य सवाल शामिल किए गए हैं।