सड़क हादसे में घायल होने सीतापुर निवासी मनोज की दाईं आंख के नीचे की हड्डी (आर्बिट फ्लोर) टूट गई थी। ऐसे में उन्हें एक ही सामान डबल दिखाई देता था। निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने इंप्लांट के जरिये हड्डी जोड़ने की बात कही। मरीज आयुष्मान कार्डधारक था।
परिवारीजन उसे लेकर 16 सितंबर को केजीएमयू के ओरल एंड मैक्सिलो फेशियल सर्जरी विभाग पहुंचे। यहां विभागाध्यक्ष डॉ. शादाब मोहम्मद ने सर्जरी की। उसकी क्षतिग्रस्त मांसपेशियों को रिपेयर करके कार्टिलेज (ऊतकों का समूह) निकाला। फिर उसे ऑर्बिट फ्लोर पर लाकर फिक्स कर दिया।
अब मरीज की आंखें फिट हो गई है। उसकी रोशनी भी ठीक है। डॉ. शादाब ने बताया कि यह ऑर्बिट फ्लोर रीकंस्ट्रक्शन बाय इअर कार्टिलेज्य तकनीक से संभव हुआ। केजीएमयू में इस तकनीक से पहली बार सर्जरी की गई है।
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