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Lucknow News: बाहर से महंगी दवाएं मंगाकर मरीजों को लगाया जा रहा चूना

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केजीएमयू।
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लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के नेत्र रोग विभाग में बाहर से दवाएं और लेंस मंगाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जांच समिति ने पाया है कि मरीजों को बाहर से दवाएं लाने के लिए मजबूर किया जाता था। इसके बाद दवाएं वापस कर वही दवाएं हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआरएफ) के स्टोर से ले ली जाती थीं। इस तरह से दोनों दवाओं के बीच का अंतर कर्मचारी रख लेते थे।
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गोरखपुर निवासी एक मरीज ने नेत्र रोग विभाग के डॉक्टर पर बाहर से दवा व लेंस मंगाने का आरोप लगाया था। करीब 18,000 रुपये की दवाएं भी तय दुकान से खरीदी थीं। पीड़ित समेत दो अन्य मरीजों ने मुख्यमंत्री पोर्टल और उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से शिकायत की तो केजीएमयू प्रशासन ने चार सदस्यीय समिति बनाकर जांच कराई। गोरखपुर जाकर मरीज के बयान लिए और जरूरी सबूत जुटाए।
जांच में पता चला कि डॉक्टर ने एक निजी कर्मचारी तैनात कर रखा था, जो ओपीडी में मरीजों को बाहर की दवा लिखी परची थमाता था और चहेते मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करता था। मेडिकल स्टोर से मरीजों को बिना पक्के बिल के महंगी दवाएं दी जाती थीं। इसके बाद कर्मचारी उन दवाओं की पुष्टि के लिए मंगा लेता था और कुछ दवाएं रोककर बाकी चुपचाप मेडिकल स्टोर को लौटा दी जाती थीं। फिर मरीज के बचे पैसे से एचआरएफ के स्टोर से सस्ती दवाएं खरीदी जाती थीं।
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निजी मेडिकल स्टोर और एचआरएफ दवा की कीमतों में काफी अंतर होता है। इस तरह से मरीज को सस्ती दवाओं का लाभ नहीं मिलता था और दवाओं के बीच का अंतर हजम कर लिया जाता था। ऐसे में एचआरएफ स्टोर पर बिक्री भी दिखती थी और उस मरीज की आईडी का इस्तेमाल भी नजर आता था।
छह महीने के दौरान ऑपरेशन कराने वालों से पूछताछ



केजीएमयू में पैरामेडिकल संकाय के डीन प्रो. केके सिंह की अध्यक्षता में बनी जांच समिति ने नेत्र रोग विभाग में छह माह पूर्व ऑपरेशन करा चुके 30 मरीजों की जानकारी जुटाई। इन मरीजों का इलाज आरोपी डॉक्टर के निर्देशन में हुआ था। समिति ने 17 मरीजों से फोन पर बात कर इलाज संबंधी दस्तावेज मांगे और बयान दर्ज किए। जांच में सामने आया कि ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं ओटी के बाहर जमा कराई जाती थीं। अब अगले कुछ दिनों में जांच पूरी होने की उम्मीद है।
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